भक्त की भक्ति प्रहलाद के जीवन चरित्र से लें प्रेरणा : आचार्य भरत लालजीशिवपुरी- जीवन में भक्ति की बहुत महत्व है यदि भक्त की भक्ति देखना है तो इसके लिए श्रीमद् भागवत कथा में भक्त प्रहलाद के चरित्र से प्रेरणा लें, जीवन में संयम और ईश्वर के प्रति श्रद्धा भाव यदि सच्चे मन से रखा है तब निश्चित ही उसका प्रतिफल मिलता है इसलिए जीवन में दुर्गणों को छोड़ ईश्वर की भक्ति का मार्ग प्रशस्त करें, श्रीमद् भागवत कथा जीवन को सरल बनाने और इस मानव जीवन को कृतार्थ करने वाली कथा है जिसमें भगवान के विभिन्न प्रसंग इस मानव प्राणी को उसके जीवन के उद्देश्य से परिलक्षित कराते है इसलिए कथा केवल सुनना ही नहीं बल्कि उसे आचरण में उतारना ही ईश्वरीय कृपा है।
श्रीमद् भागवत कथा में भक्ति का यह महत्व बताया व्यासपीठ से आचार्य भरत लाल जी ने जो स्थानीय कमला हैरीटेज होटल में ब्रजवेणु ग्रुप शिवपुरी के द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस कथा पर आर्शीवचन प्रदान कर रहे थे। कथा के द्वितीय दिवस पर आध्यात्मिक गुरू डा.रघुवीर सिंह गौर भी शामिल हुए जिन्होंने कथा पूजन में भाग लिया और कथा महिलाओं के द्वारा किए जाने पर सेवा स्वरूप 51 हजार रूपये की राशि इस पुण्य धर्म में सहयोग रूप में प्रदान करने की घोषणा की। इस दौरान पूज्य गुरूदेव डॉ.रघुवीर सिंह गौर का ब्रजवेणु ग्रुप शिवपुरी की ओर से स्वागत किया गया व आर्शीवाद लिया गया।
कथा विश्राम के समय गुरूदेव सहित समाजसेवी राजेश गोयल रजत भी श्रीमद् भागवत कथा में शामिल हुए और सपत्निक पूजन कर आरती की। ब्रजवेणु ग्रुप शिवपुरी के इस आयोजन की मुख्य संयोजिकाऐं श्रीमती इंदिरा जैन, श्रीमती सुनीता अग्रवाल, श्रीमती विभा रघुवंशी, श्रीमती इन्द्रा सर्राफ, श्रीमती रेखा अग्रवाल, श्रीमती निशा गुप्ता, श्रीमती रेनू गोयल, श्रीमती बबीता गर्ग, श्रीमती सुरेखा माहेश्वरी, श्रीमती बबीता अग्रवाल, श्रीमती नीतू गोयल, श्रीमती राजेश बिन्दल श्रीमती निशा-राजेन्द्र गुप्ता शामिल रहे। कथा में आध्यात्मिक गुरू डॉ.रघुवीर सिंह गौर ने भी आर्शीवचन दिए और कहा कि जीवन में भागवत आना चाहिए, काम, क्रोध, लोभ, मद, ईष्र्या कम हो, कथा देखेने और सुनने नहीं बल्कि आचरण से गंगारूपी बहने पर स्नान करे, यह गंगा है, यहां माता बहिनो ने यह आयोजन कर भागीरथी को प्रभावित किया है, हे कृष्ण आप राधा के बल्लभ हो, गुरूदेव ने कहा धर्म की ध्वाजा माता बहिनो ने थामी है जहां यह श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया, धर्म की रक्षा करने वाले ही धर्म के रक्षक होते है, धर्म के प्रति आस्था और श्रद्धा है और यह है तभी समर्पण है और यही समर्पण सभी के जीवन का कल्याण करेगा।




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