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Monday, September 28, 2026

नवकार महामंत्र जाप और रक्षा कवच वितरण के साथ संपन्न हुआ सामूहिक क्षमावाणी पर्व




प्रसिद्ध जैन साध्वी प्रमोद कुंवर जी ठाणा तीन ने बताई नवकार महामंत्र की महिमा

शिवपुरी-आठ दिन तक चले श्वेताम्बर जैन समाज के पर्युषण पर्व का विधिवत समापन प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी नवकार महामंत्र जाप, क्षमावाणी और सामूहिक साधर्मिक वात्सल्य के साथ औपचारिक रूप से समापन हुआ। यह रस्म आज से 25 वर्ष पूर्व साध्वी प्रमोद कुंवर जी महाराज साहब की प्रेरणा से स्थानकवासी जैन समाज ने प्रारंभ की थी। जिसमें स्थानकवासी समाज के साथ-साथ श्वेताम्बर मूर्ति पूजक समाज भी बढ़ चढ?र भाग लेता हैं। इस वर्ष यह सौभाग्य रहा कि यह धार्मिक पर्व 25 वर्ष पश्चात साध्वी प्रमोद कुंवर जी, साध्वी चेतना जी और साध्वी समीता जी के सानिध्य में उत्साह पूर्वक मनाया गया। 

इस दौरान नवकार महामंत्र का जाप हुआ, साध्वी समीता जी ने नवकार महामंत्र की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला और साध्वी प्रमोद कुंवर जी ने समाज के सभी गणमान्य नागरिकों को इस अवसर पर रक्षा कवच का वितरण किया और कहा कि इस रक्षा कवच के धारण करने से न केवल सांसारिक बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती हैं। समापन अवसर पर श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कोचेटा ने याद दिलाया कि पर्युषण पर्व के पश्चात यह धार्मिक समारोह प्रतिवर्ष 25 सालों से साध्वी प्रमोद कुंवर जी की प्रेरणा से संचालित हो रहा है और निकट भविष्य में भी होता रहेगा तथा यह खुशी की बात है कि इस वर्ष साध्वी प्रमोद कुंवर जी की उपस्थिति में यह समारोह आयोजित हो रहा है। मूर्तिपूजक जैन समाज के अध्यक्ष तेजमल सांखला ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि इससे दिलों की कटुता दूर होती है और समाज के लोगों में भातृभाव तथा प्रेम की भावना का विकास होता है। कार्यक्रम का संचालन राजकुमार श्रीमाल ने किया।

इस वर्ष स्थानकवासी जैन समाज में चातुर्मास के दौरान पर्युषण पर्व खासे उत्साह के साथ मनाया गया। तीन वर्षों के पश्चात पहली बार स्थानकवासी समाज में साध्वी जी का चातुर्मास हो रहा है इससे समाज में तपस्या और धर्म आराधना की झड़ी लग गर्ई। पर्युषण पर्व में अंतगढ़ सूत्र और कल्पसूत्र का वाचन हुआ तथा भगवान महावीर का जन्मोत्सव बहुत उत्साह तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आधा सैकड़ा से अधिक श्रावक और श्राविकाओं ने पर्युषण पर्व के दौरान कठोर तपस्या की। प्रति दिन प्रवचन और प्रतिक्रमण का आयोजन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल हुए। पर्युषण पर्व के दौरान प्रतिक्रमण में साधक प्रतिदिन सुबह और शाम अपनी गलती और भूलों के लिए क्षमा याचना करते हैं तथा अंतिम दिन सांवत्सरिक  प्रतिक्रमण में वर्ष भर की अपनी भूलों के लिए संसार के समस्त प्राणियों से क्षमा याचना की गई। 

अंतिम दिन तपस्या करने वाले श्रावकों का सम्मान स्थानकवासी जैन समाज, श्रीमाल परिवार और रीतेश गुलिया परिवार ने प्रथक-प्रथक रूप से किया। पर्युषण पर्व की समाप्ति के बाद सुविधाजनक तिथि पर नवकार महामंत्र के जाप का सामूहिक रूप से आयोजन किया गया। इसमें स्थानकवासी और मूर्तिपूजक जैन समाज के सदस्यों ने एक घंटे तक नवकार महामंत्र का जाप किया। इस जाप के बाद अपने संबोधन में साध्वी समीता जी ने बताया कि नवकार महामंत्र जैन धर्म का एक सबसे पवित्र और सर्वोच्च महामंत्र हैं। जिसमें किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि संपूर्र्ण रूप से विकसित और वीतरागी आत्माओं का गुणगान किया जाता हैं।

इस महामंत्र के जाप से दो करोड़ के वलियों, अनंत सिद्धों, किसी भी धर्म के आचार्यों, उपाध्यायों, नौ हजार करोड़ साधु साध्वियों को नमस्कार किया जाता हैं। नवकार महामंत्र के जाप से जीवन में विनम्रता आती है और मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है। इस अवसर पर स्थानकवासी जैन महिला मंडल ने धर्म प्रभावना बढ़ाने के लिए श्रीमती यशोदा शर्मा और हरी शर्मा का अभिनंदन किया और उन्हें सम्मानित किया। आभार प्रदर्शन की रस्म राजेश कोचेटा ने निर्वहन की। अंत में सामूहिक साधर्मिक वात्सल्य के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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