30 दिन 30 कार्यशाला अभियान की 28वीं कार्यशाला में 'अल्पविरामÓ के जरिए स्वयं से जुडऩे का मिला अवसरशिवपुरी। आनंद विभाग जिला शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में चलाए जा रहे '30 दिन–30 कार्यशाला अभियानÓ के अंतर्गत 28वीं कार्यशाला कन्या महाविद्यालय शिवपुरी में छात्राओं के लिए आयोजित की गई। कार्यशाला में छात्राओं ने पढ़ाई, करियर और भविष्य की तैयारियों के बीच कुछ पल ठहरकर स्वयं को समझने, अपने आनंद को पहचानने और जीवन के रिश्तों एवं मूल्यों पर विचार करने का अनुभव लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ जिला संपर्क व्यक्ति अभय कुमार जैन ने 'इतनी शक्ति हमें देना दाताÓ प्रार्थना के साथ किया। कार्यशाला के सत्र में मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने छात्राओं से उनके जीवन में आनंद के स्रोतों पर संवाद किया। उन्होंने छात्राओं को यह समझने के लिए प्रेरित किया कि किन परिस्थितियों में उनका आनंद बढ़ता है और किन कारणों से कम होता है। 'अल्पविरामÓ के माध्यम से छात्राओं ने कुछ समय के लिए बाहरी भागदौड़ से विराम लेकर अपने विचारों, भावनाओं, रिश्तों और जीवन की प्राथमिकताओं को देखने का अभ्यास किया।
संवाद के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि पढ़ाई, करियर और भविष्य को लेकर अपेक्षाओं के बीच स्वयं के लिए समय निकालना भी जरूरी है। परिस्थितियां हमेशा हमारे अनुसार नहीं होतीं, लेकिन उनके बीच स्वयं को किस तरह रखा जाए, इस पर सजगता से विचार किया जा सकता है। आनंद केवल बाहरी सुविधाओं में नहीं, बल्कि स्वयं को समझने और अपने भीतर से जुडऩे में भी मिलता है। इसके बाद आनंदम सहयोगी पुष्पेन्द्र लोधी ने 'जीवन का लेखा-जोखाÓ गतिविधि कराई। छात्राओं ने जीवन में दूसरों की नि:स्वार्थ मदद करने और दूसरों से मिले सहयोग, सुख-दुख तथा कृतज्ञता जैसे अनुभवों को याद करते हुए अपने जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखा। गतिविधि ने उन्हें यह सोचने का अवसर दिया कि जीवन की वास्तविक समृद्धि केवल उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अच्छे रिश्तों, सहयोग और कृतज्ञता में भी निहित है।
कार्यशाला के दौरान छात्राओं ने स्वयं से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर विचार किया और अपने अनुभव साझा किए। अपने जीवन में छोटी-छोटी खुशियों को पहचानना, रिश्तों के महत्व को समझना और वर्तमान क्षण को महसूस करना भी संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। कार्यशाला के अंत में आनंदम सहयोगी बृजेश सिंह तोमर ने छात्राओं से फीडबैक प्राप्त किया। छात्राओं ने कार्यशाला के विभिन्न सत्रों के माध्यम से स्वयं के जीवन, आनंद, रिश्तों और मूल्यों को नए दृष्टिकोण से देखने के अनुभव साझा किए।

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