Responsive Ads Here

Shishukunj

Shishukunj

Tuesday, August 2, 2022

तीर्थ क्षेत्रों को मनोरंजन के नहीं बल्कि आत्म कल्याण का स्थान बनाए : मुनिश्री सुप्रभसागर जी




श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगम्बर छत्री मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री ने संसारी प्राणी को बताया तीर्थस्थलों का महत्व

शिवपुरी-संसारी प्राणी का जब कभी किसी का मन उदास होता है तो वह अक्सर हिल स्टेशनों की ओर रूख करता है और वहां भी सभी प्रकार के संसाधना मौजूद हो तो वह अपनी यात्रा की पूर्ण तैयारी भी कर लेता है लेकिन वह यह भूल जाता है कि जिस स्थान पर वह जा रहा है वहां की ऊर्जा क्या है, वहां का इतिहास क्या है बाबजूद इसके जाने अधिकांश लोगों ने यह मन बना लिया है कि तीर्थ स्थानों पर भी वह दर्शन करने के बजाए घूमने का स्थान समझकर पहुंचने लगा है और यही वजह है कि आज मनुष्य महावीर जी हो या संवेदशिखर हो अथवा कोई अन्य प्रसिद्ध तीर्थ स्थल वहां इन तीर्थ क्षेत्रों को मनोरंजन के स्थान मान लिया 

लेकिन यह तीर्थ किसी मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि मनुष्य आत्मकल्याण के स्थल है इसलिए इनके महत्व को जानें और तीर्थ यात्रा को तीर्थ की भांति करें तभी यह यात्रा सफल होगी। तीर्थ स्थलों का यह महत्व बताया कि प.पू.मुनिश्री सुप्रभसागर जी महाराज ने जो स्थानीय श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगम्बर छत्री मंदिर में चार्तुमास प्रवास के दौरान आयोजित धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्मोंपदेश देकर जीवन कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहे थे। 

इस दौरान मुनिश्री ने अपने आर्शीवचनों में कहा कि एक समय था जब कोई तीर्थ यात्रा पर जाता था तो पूरा गांव और परिजन सहित रिश्तेदार उन्हें तीर्थस्थल के लिए भाव विभोर होकर रवाना करते थे लेकिन आज देखने में आ रहा है कि मनुष्य जिस तीर्थ स्थान की ओर जाने की मन करता है वहां पहले सभी तरह की व्यवस्थाऐं करता है विभिन्न संसाधनों की उपलब्धता होने पर बुकिंग भी करता है और आज कोई उसे छोडऩे तक नहीं जाता बल्कि वह स्वयं अपने परिवार के साथ उस तीर्थ स्थान पर तीर्थ करने नहीं बल्कि घूमने के लिए चला जाता है 

ऐसे में इस तरह का तीर्थ पर जाना उचित नहीं है यदि कहीं तीर्थ यात्रा पर जा ही रहे है तो वहां की वस्तुस्थिति, इतिहास और उस क्षेत्र को जानें वहां की मिट्टी को जानें, क्योंकि तीर्थ स्थलों की मिट्टी से मनुष्य सहित प्रत्येक जीव-जन्तु वनस्पति को नई ऊर्जा मिलती है। ऐसे में तमाम तरह की सुविधाओं को त्याग कर केवल परमात्मा के लिए तीर्थ पर जाया जाए तो वह तीर्थ यात्रा है अन्यथा ऐसे स्थानों को अधिकांश लोगों ने मनोरंजन के स्थल के रूप में भी चुनना शुरू कर दिया है। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी सभा में मौजूद रहे। पूर्व विधायक देवेन्द्र जैन ने भी मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर आर्शीवाद प्राप्त किया।  

04 अगस्त को मनाया जाएगा मोक्ष सप्तमी महोत्सव
शहर के गुरूद्वारा रोड़ स्थित श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगम्बर छत्री मंदिर परिसर में आगामी 04 अगस्त को सायं 6:30 बजे मुनिश्री सुप्रभसागर जी म.सा. की पावन निश्रा में समाजजनों के द्वारा मोक्ष सप्तमी महोत्सव मनाया जाएगा। जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन करने वाले बच्चों में से विजयी प्रतिभागियों को पारितोषित भी दिया जाएगा साथ ही अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाऐंगें। इस दौरान समस्त जैन समाज से  अधिक से अधिक संख्या 4 अगस्त को मनाए जाने वाले मोक्ष सप्तमी महोत्सव कार्यक्रम में भाग लेने का आह़्वान किया गया है।

No comments:

Post a Comment