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Shishukunj

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Tuesday, April 30, 2024

सच्ची जन सेवा और गौ सेवा का प्रतीक जानकी सेना संगठन


गौजल सेवा के लिए शहर में तीन सौ पचास टंकियों का लक्ष्य किया पूरा

शिवपुरी। आज जहां भारत देश का एक बड़ा तबका पाश्चात्य सभ्यता की चकाचौंध में डूबा हुआ है और लगातार पश्चिमी सभ्यता का अनुसरण करने में स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है ऐसे में एक ऐसा संगठन भी है जो दिन रात भारतीय संस्कृति को बचाने और लोगों में धर्म के प्रति चैतन्यता जागृत कर धर्म जागरण का कार्य करने में लगा हुआ है। जी हाँ अखिल भारतीय जानकी सेना संगठन पिछले 9 वर्षों से लगातार अविराम सुंदरकांड के माध्यम से लोगों में धर्म के प्रति आस्था पैदा करने के साथ ही बच्चों को संस्कारित करने का काम भी कर रहा है। गौ सेवा के क्षेत्र में तो जानकी सेना संगठन ने आयाम स्थापित कर दिए हैं पूरे शहर भर में भीषण गर्मी के चलते जानकी सेना संगठन ने आवारा मवेशी और गौ माता के लिए पानी की टंकियों को रखने का बीड़ा पिछले 9 वर्षों से लगातार उठा रखा है। इस बार भी शहर में लगभग 350 टंकियों को रखने का लक्ष्य जानकी सेना संगठन के द्वारा पूरा कर लिया गया है। संगठन का पानी की टंकी रखवाने वालों से एक ही आग्रह होता है कि वह समय-समय पर टंकियां को साफ करें और उसमें साफ स्वच्छ पीने योग्य पानी ही भर कर गौ माता की सेवा में रखें जिससे गौ माता की वास्तविक रूप से सेवा की जा सके और जानकी सेना संगठन अपने इस कार्य को बखूबी पूरी कर्तव्य परायणता के साथ निभा रहा है।

सेवा प्रकल्पों के साथ सुंदरकांड है हमारा मूल आधार:विक्रम सिंह
हमारे संवाददाता से हुई बातचीत में अखिल भारतीय जानकी सेना संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिकम सिंह रावत ने बताया कि हमारे द्वारा विगत 9 वर्षों से लगातार हर शनिवार को सुंदरकांड किया जा रहा है और हमारे संगठन का मूल आधार सुंदरकांड की है। अभी तक हम सा?े 500 से अधिक सुंदरकांड लगातार कर चुके हैं और यह अविराम जारी है जिस समय कोरोना काल चल रहा था लोग घरों में बंद थे और भीड़ एकत्रित करने की शासन के द्वारा मनाही थी सोशल डिस्टेंसन का पालन करते हुए हमारे द्वारा घर-घर श्रृंखला बनाई गया और लोगों ने घरों में बैठकर सुंदरकांड किया। घर घर सुंदरकांड हर घर सुंदरकांड हमारा लक्ष्य है और हम इस लक्ष्य की प्राप्ति में दिन रात एक कर लगे हुए हैं। संगठन के द्वारा मूल रूप से 12 सेवा प्रकल्प  कार्य किये जा रहे हैं इसके अलावा हमारा प्रयास रहता है कि हम किसी भी छोटे उत्सव पर्वो को भी पूरे प्रसन्नचित मन से मनाए और समाज को एक संदेश दें।  

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