प्रादेशिक नेतृत्व की उदासीनता से क्षुब्ध होकर शिवपुरी जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह राजपूत का इस्तीफाशिवपुरी। नर्सिंग संवर्ग की मांगों की अनदेखी और प्रादेशिक नेतृत्व के लचर रवैये से नाराज होकर आज नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन के शिवपुरी जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह राजपूत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले 3 वर्षों से संगठन को मजबूती प्रदान कर रहे श्री राजपूत का इस्तीफा जिला इकाई और प्रदेश संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
इस्तीफे के मुख्य कारण
शिवराज सिंह राजपूत ने अपने त्यागपत्र में प्रदेश अध्यक्ष रमेश जाट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस्तीफे के पीछे मुख्य कारण बताए गए है जिसमें मूलभूत मांगों की अनदेखी नर्सिंग ऑफिसर्स के पे फिक्शएशन (वेतन निर्धारण) जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दे पर प्रदेश नेतृत्व द्वारा लंबे समय से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पदनाम परिवर्तन की विसंगति मेल नर्स से नर्सिंग ऑफिसर जैसे सम्मानजनक पदनाम और उससे जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के प्रति संगठन की शिथिलता। नेतृत्व की उदासीनता प्रदेश अध्यक्ष रमेश जाट द्वारा संगठन के दायित्वों के प्रति लगातार बरती जा रही उदासीनता, जिससे प्रदेश भर के नर्सिंग कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।
शिवराज सिंह राजपूत ने अपने त्यागपत्र में प्रदेश अध्यक्ष रमेश जाट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस्तीफे के पीछे मुख्य कारण बताए गए है जिसमें मूलभूत मांगों की अनदेखी नर्सिंग ऑफिसर्स के पे फिक्शएशन (वेतन निर्धारण) जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दे पर प्रदेश नेतृत्व द्वारा लंबे समय से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पदनाम परिवर्तन की विसंगति मेल नर्स से नर्सिंग ऑफिसर जैसे सम्मानजनक पदनाम और उससे जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के प्रति संगठन की शिथिलता। नेतृत्व की उदासीनता प्रदेश अध्यक्ष रमेश जाट द्वारा संगठन के दायित्वों के प्रति लगातार बरती जा रही उदासीनता, जिससे प्रदेश भर के नर्सिंग कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।
शिवराज सिंह राजपूत का वक्तव्य है कि मैंने पिछले 3 सालों से शिवपुरी जिलाध्यक्ष के रूप में पूरी निष्ठा से काम किया, लेकिन जब प्रदेश नेतृत्व ही नर्सिंग ऑफिसर के मूलभूत हक और मान-सम्मान की लड़ाई लडऩे में रुचि नहीं दिखा रहा, तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। संगठन की इस उदासीनता के कारण मैं अपने पद से त्यागपत्र दे रहा हूँ। इस निर्णय के बाद जिले के नर्सिंग कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया है। चर्चा है कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने जल्द ही अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया, तो अन्य जिलों से भी इस्तीफे का दौर शुरू हो सकता है।

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