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Friday, February 20, 2026

आत्मा की अनंत शक्ति का धोतक है जैन दर्शन: राष्ट्र संत सौरभ मुनि


अपने कर्र्मों का क्षय कर आत्मा प्राप्त करती है परम तत्व

शिवपुरी-जैन दर्शर्न में आत्मा अनंत ज्ञान, अनंत दर्शर्न, अनंत शक्ति और अनंत-आनंद का पर्यार्य है। लेकिन आत्मा के ये गुण कर्र्मों से आच्छादित रहते हैं इस कारण आत्मा की शक्ति प्रकट नहीं हो पाती। लेकिन साधक यदि अपनी साधना के द्वारा कर्र्मों का क्षय कर लेता है तो आत्मा को परमात्मा बनने में देर नहीं लगती और आत्मा की यह शक्ति परम तत्व को प्राप्त कर मोक्ष पद को प्राप्त कर लेती है। उक्त उदगार पोषद भवन में प्रसिद्ध जैन राष्ट्र संत सौरभ मुनि जी ने धर्मोर्वलम्बियों की सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि जैन धर्म 24 तीर्र्थंकरों की शिक्षाओं पर आधारित है और हर काल में 24 तीर्र्थंकर विधमान रहते हैं। धर्मर्सभा में उनके सुशिष्य विज्ञान मुनि भी उपस्थित थे।

धर्मर्सभा में संत सौैरभ मुनि ने बताया कि जैन धर्म में प्रत्येक आत्मा को परमात्मा बनने का अवसर है। हमारा शरीर पुदगल (जड़) लेकिन आत्मा अजर-अमर है, परन्तु अपने कर्र्मों से ढकी होने के कारण वह अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट नहीं होती है। आत्मा को कर्र्मों से मुक्त करने के लिए जैन दर्शर्न में मोक्ष प्राप्ति हेतु तीन मार्र्ग बताए गए हैं। सम्यक दर्शर्न, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण से आत्मा को परमात्मा बनने के लक्ष्य तक ले जाना सुगम हैं। 

उन्होंने बताया कि आत्मा जब कर्मों के बंधन से मुक्त हो जाती है तो साधक केवली अवस्था को प्राप्त कर केवल्य ज्ञान का धारक होता है। परमात्मा के इस स्वरूप को अरिहंत के रूप में परिभाषित किया जाता है। अरिहंत भगवान का हमारे ऊपर अनंत उपकार होता है और वह हमें मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं। अरिहंत परमात्मा जब संसार त्याग देते हैैं तो वह सिद्ध के रूप में हमारे लिए पूज्यनीय होते हैं। उन्होंने बताया कि नवकार महामंत्र में सबसे पहले अरिहंत भगवान और फिर सिद्ध भगवान को नमस्कार किया जाता है। उनके अलावा आचार्य भगवान, उपाध्याय भगवान और संतों का भी हम पर उपकार होता है और नवकार महामंत्र में उन्हें भी नमस्कार कर अपने भावों की अभिव्यक्ति की जाती है।

कल पोषद भवन और परसों आराधना भवन में होंगे प्रवचन
आज की धर्मर्सभा में श्वेताम्बर मूर्ति पूजक समाज के महामंत्री विजय पारख भी उपस्थित थे जिन्होंने राष्ट्र संत सौरभ मुनि से रविवार 22 फरवरी को श्वेताम्बर पार्श्वर्नाथ जैैन मंदिर के उपाश्रय स्थल आराधना भवन में प्रवचन देने की बिनती की। जिसे संत सौरभ मुनि ने सहर्ष रूप से स्वीकार किया। इस अवसर पर बताया गया है कि महाराजश्री के 21 फरवरी के प्रवचन सुबह 9:30 से 10:30 बजे तक पोषद भवन में और 22 फरवरी के प्रवचन सुबह 9:30 से 10:30 बजे तक आराधना भवन में होंगे। सभी धर्मर्प्रेमियों से सत्संग का लाभ उठाने की अपील की गई है।

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