न्यायालय में अनुसंधान की कमियों और अभियोजन की कहानी पर उठाए सवाल, बचाव पक्ष के तर्कों को मिला महत्वशिवपुरी। लगभग 30 किलो चरस की बरामदगी से जुड़े बहुचर्चित आपराधिक प्रकरण में न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। मामले में शिवपुरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विजय तिवारी ने अपने सहयोगी अधिवक्ता राजीव धनावत के साथ बचाव पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी तथ्यों और अनुसंधान में सामने आई कमियों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा।
अधिवक्ता विजय तिवारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रकरण में 4 सितंबर 2025 को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए मझेरा गांव के पास एक कार से चरस बरामद करने का दावा किया था। पुलिस कार्रवाई में दो बैगों में रखे 30-30 पैकेटों में कुल 30 किलो 295 ग्राम चरस बरामद होना बताया गया था। मामले में संदीप सरदार सहित अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। प्रकरण की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विजय तिवारी ने अभियोजन के साक्ष्यों, जब्ती की प्रक्रिया और अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं पर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तर्क प्रस्तुत करते हुए अभियोजन की कहानी में मौजूद कमियों को रेखांकित किया। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह पक्ष रखा कि आरोपों को प्रमाणित करने के लिए प्रस्तुत साक्ष्यों का विधिसम्मत और विश्वसनीय होना आवश्यक है।
न्यायालय ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं अनुसंधान से जुड़े तथ्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय सुनाया। अधिवक्ता विजय तिवारी के साथ अधिवक्ता राजीव धनावत ने भी बचाव पक्ष की ओर से पैरवी की। इस प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत कानूनी तर्क और अनुसंधान से संबंधित बिंदु सुनवाई के प्रमुख पहलू रहे। न्यायालय के निर्णय से स्पष्ट होता है कि आपराधिक मामलों में आरोपों का निर्धारण केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और विधिक कसौटियों के आधार पर किया जाता है।

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