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Wednesday, August 27, 2025

अविश्वास प्रस्ताव से अमान्य होने के बाद अब पार्षद आज कलेक्टर को सौंपेंगे अपना इस्तीफा


भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों ने सोशल मीडिया पर इस्तीफा देने की घोषणा

शिवपुरी।  नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अमान्य होने के बाद अब पार्षदों ने मिलकर अपने इस्तीफे की घोषणा सोशल मीडिया के माध्यम से की है। इसमें लगभग दर्जन भर से अधिक भाजपा, कांग्रेस सहित निर्दलीय पार्षद शामिल है। कलेक्टर के समक्ष सौंपे जाने वाले इस्तीफों को लेकर पार्षदगण अपनी रणनीति बना रहे है और सभी सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंपकर पार्षद पद से मुक्त होना चाहते है।

बताना होगा कि बीते दो माह से नपाध्यक्ष के खिलाफ विपक्षी पार्षदों का विरोध जारी था लेकिन इसी बीच जब अविश्वास प्रस्ताव की बात आई तो ऐन वक्त पर कुछ पार्षदों ने सहमतिपूर्वक एक पत्र कलेक्टर को देकर अविश्वास प्रस्ताव वापस ले लिया, जिसके बाद पार्षदों में दो फाड़ हुए और अब विपक्षी पार्षदों ने मिलकर अपने पद से त्याग पत्र देने की बात कही है। अब विरोधी गुट ने इस्तीफों का दांव चल दिया है। बुधवार को सोशल मीडिया पर बगीचा सरकार की शपथ लेकर राजनीति में उतरे पार्षदों ने अपने-अपने व्यक्तिगत अकाउंट से पोस्ट करते हुए इस्तीफे की घोषणा कर दी। इन पार्षदों में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय—तीनों दलों के लोग शामिल हैं। 

इस्तीफा देने वाले पार्षदों में वार्ड 37 से गौरव सिंघल, वार्ड 6 से मोनिका सीटू सरैया, वार्ड 21 से भाजपा पार्षद राजू गुर्जर, वार्ड 17 से राजा यादव, वार्ड 15 से ममता बाईसराम धाकड़, वार्ड 4 से संजय गुप्ता पप्प, वार्ड क्रं.31 से श्रीमती मीना पंकज शर्मा एवं वार्ड 20 से विजय शर्मा बिंदास, वार्ड नं.5 से ओमप्रकाश जैन ओमी, वार्ड नं.12 से सरोज धाकड़ शामिल है। इन सभी ने सोशल मीडिया पर लिखकर कहा कि वे नपाध्यक्ष से आहत होकर मान-सम्मान की लड़ाई में इस्तीफा दे रहे हैं और शुक्रवार को जिलाधीश को औपचारिक तौर पर अपना त्यागपत्र सौंपेंगे।

अविश्वास प्रस्ताव अमान्य के बाद अब इस्तीफों का दौर
अविश्वास प्रस्ताव आमन्य होने के बाद अब अब पार्षदों ने इस्तीफों का दांव विरोधी गुट ने चला है। इसमें करीब दर्जन भर पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे की घोषणा ने नपा की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कलेक्टर इन इस्तीफों को स्वीकार करते हैं या नहीं। दो माह से शिवपुरी की राजनीति में छाया घमासान अब अविश्वास से इस्तीफों तक पहुंच चुका है। गायत्री शर्मा की कुर्सी भले ही फिलहाल सुरक्षित दिख रही हो, लेकिन इस्तीफों की गूंज और नेताओं की रणनीतियों ने पूरे घटनाक्रम को और पेचीदा बना दिया है।

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