लेखिका : डॉ मेनका जादौन
इंदौर विभाग प्रमुख महिला आयाम प्रज्ञा प्रवाह
हाल ही में अमेरिका ने सैन्य प्रभाव दिखते हुए वेनेजुएला 2024 चुनाव में मतो को चोरी के मुद्दे को उठाते हुए राष्ट्रपति निकोल समादुरो औरउनकीपत्नीकोरातोरातबंदीबनालिया। पर क्या ये लोकतंत्र की रक्षा की चिंता है या वैश्विक स्तर पर डॉलर के प्रभाव पर खतरे की आशंका से उठाया हुआ एक ऐसा कदम जिसने पूरी दुनिआ को ट्रेडवॉर या फिर ये कहले कि तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल दिया।
चिंता यह है कि इस वैश्विक असंतुलन की स्थिति में आम व्यक्ति पर कैसा प्रभाव पड़ेगा। जब युद्ध बाड़ारो में लगे जाने लगे तो महंगाई बढ़ती है और आम आदमी का जीवन कठिन हो जाता है। सोना आज आम आदमी की पहुँच के बहुत दूर हो चुका है इसका कारण क्या दुनिया में सोना का महो गया है ये है या डॉलर के वर्चस्व की लड़ाई है, क्यों वेनेजुएला में लोकतंत्र को खतरा है दुनिया में और भी कई देश है जहां संसाधनों की कमी है पर वो चिंता का विषय नहीं है।
प्रथम विश्व युद्ध के साथ ही अमेरिका ये समझ चुका था की डॉलरकेबदलेसोना ही ऐसी व्यस्था है जिससे वो चिरकाल तक समृद्धता सुनिश्चित कर सकता है और तब से अब तक दुनिया पर अपना दबदबा बरकरार रखा है जिसका तोड़ है ब्रिक्स। दुनिया के एक तरफे झुकाव से अलग कुछ देशो ने मिलकर अपनी दिशा बदलने का सोचा। यह गठबंधन किसी सैन्य ताकत का प्रदर्शन नहीं बल्कि विकल्प की मांग है। आज दूसरे पोल की बड़ी शक्तियों ने मिलकर साहस किया कि वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था हो और नयी करेंसी की मांग जो डॉलर की मोनोपोली को तोड़े जिससे पावर का विकेन्द्रीकरण हो।
डॉलर सिर्फ विनिमय वस्तु नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति का औजार है। अंतरास्ट्रीय ट्रेड फंडिंग और नियंत्रण का आधार है। डॉलर के बदले तेल ये संधि ना केवल अपना स्वामित्व अपितु सेंक्शन लगाने का भी दुस्साहस देती है। वही ब्रिक्सलोकल विनिमय को साहस देता हैं साथ ही डॉलर की निर्भरता का समाप्त भी करता है। यदि ये ना हो तो डॉलर की अनिवार्यता कम होगी और अमेरिकन सुप्रीमों से भी खतरे में आज आती है। हाल ही में रूस भारत और वो सभी देश जो विकप्ल की बात कर रहे है हमने देखा की उन पर सेंक्शंस लगाए गए इसमे ंसंसाधन युक्त होना भी इसी शामिल है। इन देशो पर प्रतिबन्ध लगाना उन्हें अलग थलग करना और नेरेटिव सेट करना उन पर सीधा दबाव लगानाहै जो दिशा देता है आर्थिक असंतुलन , मुद्रा दबाव और राजनैतिक फेरबदल को। वही चीन ताइवान पर अपने नियंत्रण को और मजबूत कर रहा ह ैक्योकि सेमीकंडक्टरको अमेरिका यही से लेता है। महान इतिहासकार ने कहा था कि तीसरा विश्व युद्ध हथियारों से नहीं बल्कि संसाधनों से लड़ा जायेगा और हम युद्ध की स्थिति में है। वेनेजुएला का डॉलर के प्रभाव से हटकर वैकल्पिक मुद्रा की मांग का सहमति दी जिससे लोकतंत्र खतरे में आ गया। सवाल यह है कि क्या इस अस्थिरता में अंतर्राष्ट्रीय लॉ को अनदेखा किया जा सकता है। किसी एक ध्रुव से बांध जाना सरल है पर आजादी नहीं। हमें तेल चाहिए, व्यापार भी साथ ही निर्णय लेने की आजादी भी। दुनिया का बहु धु्रवीय होना संतुलन बनाने के लिए ये जरूरी है।

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