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𝙎𝙝𝙞𝙫𝙥𝙪𝙧𝙞 𝙆𝙝𝙖𝙗𝙖𝙧

Tuesday, January 6, 2026

पराजय और निराशा के घने अँधेरे में भी तात्या टोपे ने 1857 की क्रांति की ज्योत को जलाये रखा


अमर हुतात्मा तात्या टोपे जयंती पर दीपयज्ञ स्मृत्यांजलि कार्यक्रम स्मारक स्थल पर हुआ आयोजित -

शिवपुरी- कई-कई बार सेनाएँ एकत्र करके युद्ध करना, युद्ध जीतना या हारना और संगठन समाप्ति के बाद अगले मोर्चे पर फिर सेना का संगठन खड़ा कर देना और हर मोर्चे पर उसी ऊर्जा, आत्मविश्वास और धैर्य के साथ ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ संघर्ष के लिए खड़े हो जाना - तात्या टोपे के युद्ध संचालन की यह असाधारण शैली थी। तात्या टोपे में धारा को अपने साथ बहा ले जाने का साहस और सामर्थ्य था। लोग उनसे अपने आप जुड़ते चले जाते थे। उक्त विचार अमर हुतात्मा क्रांतिवीर तात्या टोपे जयंती के अवसर पर गायत्री परिवार शिवपुरी के सहयोग से आयोजित दीपयज्ञ स्मृत्यांजलि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर दिग्विजय सिंह सिकरवार ने व्यक्त किए। 

            अमर हुतात्मा तात्या टोपे के जीवनवृत को रेखांकित करते हुए प्रोफेसर दिग्विजय सिंह सिकरवार ने कहा कि गहरे अंधकार में आशा का आलोक उत्पन्न करने की अनोखी क्षमता तात्या टोपे के भीतर थी। अपने इसी अद्भुत सामर्थ्य से उन्होंने भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम को इतना व्यापक और प्रखर बना दिया कि ब्रिटिश हुकूमत हिल गई।आजादी के महानायक क्रांतिवीर तात्या टोपे को नेतृत्व संचालन विरासत में नहीं मिला था। वे पद-प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं बल्कि स्वयं को सिद्ध करते हुए आगे बढ़े और एक सेवक से महानायक बन गए। यही है बिंदु से विराट की कल्पना का साकार स्वरूप। बिंदु बिंब बनता है और बिंब परिदृश्य पर स्थापित हो जाते हैं, ठीक इसी तरह तात्या टोपे राष्ट्रीय स्वाधीनता समर के परिदृश्य पर छा गए, स्थापित हो गए।

           तात्या टोपे जयंती पर इस दीपयज्ञ कार्यक्रम का आयोजन गायत्री परिवार शिवपुरी के सहयोग से हुआ और दीपयज्ञ कार्यक्रम के मुख्य यजमान पूर्व विधायक प्रहलाद भारती रहे। पूर्व विधायक प्रहलाद भारती ने इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए कहा कि 

अमर शहीद क्रांतिवीर तात्या टोपे ने आजादी के आंदोलन में ब्रिटिश हुकूमत की नींव को उस दौर के सभी क्रांतिकारी नेताओं की अपेक्षा कहीं अधिक ताक़त और सामर्थ्य के साथ हिलाकर रख दिया था। ब्रिटिश हुकूमत के साथ लंबे समय तक उन्होंने संघर्ष किया और ब्रिटिश फ़ौज के आधे दर्जन कमाण्डरों को छकाए रखा जो उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। मित्र ही नहीं बल्कि दुश्मन भी तात्या टोपे के सैनिक अभियानों को जिज्ञासा और उत्सुकता की दृष्टि से देखने और समझने का प्रयास करते थे। 

            अमर हुतात्मा क्रांतिवीर तात्या टोपे जयंती पर आयोजित दीपयज्ञ कार्यक्रम में मुख्य रूप से गायत्री परिवार से एन. आर. महते, अनिल रावत, डॉ. पी.के. खरे, गौरीशंकर गुप्ता, हरिराम साहू, शिक्षाविद एम.एस. द्विवेदी, रूपकिशोर वशिष्ठ, जेलर विजय सिंह मौर्य, एडवोकेट विवेक जैन, रामलखन धाकड़, साहित्यकार श्याम बिहारी सरल सहित नगर के प्रबुद्ध नागरिकों की उपस्थिति रही।

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