गुडयि़ा के माध्यम से गुड व बैड टच के बारे में बताया शिवपुरी/करैरा-जिला सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला
विधिक सेवा प्राधिकरण आर बी कुमार के मार्गदर्शन में करैरा के द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश एवं तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने करैरा स्थित लिटिल आइंस्टीन बचपन स्कूल में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया। शिविर में न्यायधीश श्री सक्सेना ने छात्र-छात्राओं को डॉल (गुडयि़ा) को हाथ में पकड़ कर उसके माध्यम से गुड टच-बैड टच के बारे में विस्तार से समझाया। न्यायाधीश ने प्राथमिक स्तर तक के छात्र-छात्राओं को अवगत कराया कि प्रेम पूर्वक उनके शरीर को माता-पिता, भाई-बहन, शिक्षक या अन्य कोई भी अच्छी दृष्टि से स्पर्श व बुरी दृष्टि से स्पर्श करता है, तो उस में अंतर है। जो आप लोगों को समझ आना चाहिए, यदि कोई बुरी दृष्टि से स्पर्श करता है तो सबसे पहले माता-पिता या शिक्षकों को इसकी सूचना अवश्य दें। न्यायाधीश श्री सक्सेना ने कहा कि बच्चे स्पर्श वाली घटना को कदापि न छुपाये, बल्कि पहली बार में ही अपने निकटतम परिजन को तत्काल बताएं। प्राचार्य भावना गुप्ता की उपस्थिति में बच्चों ने मौलिक जिज्ञासा के अंतर्गत प्रश्न उत्तर भी किए। जिसके सरल भाषा में समाधान भी न्यायाधीश श्री सक्सेना द्वारा किए गए। विद्यालय के आंतरिक निरीक्षण के दौरान सहायक रविंद्र रजक द्वारा विद्यालय में शिकायत पेटी न होने पर न्यायाधीश को अवगत कराया। जिस पर प्राचार्य ने तत्काल ही लगाए जाने का आश्वासन दिया। न्यायधीश श्री सक्सेना छात्र छात्राओं के साथ घुलते मिलते अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव भी साझा किये। इस अवसर पर पैरालीगल वॉलिंटियर अनिल राय, निहाल लाहोरी, राम प्रसाद वर्मा, विद्यालय की शिक्षिका मनीषा पाठक, पूनम गुप्ता, स्वाति गुप्ता, बंदना, विकास गुप्ता, संजय, मुकेश सहित छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
विधिक सेवा प्राधिकरण आर बी कुमार के मार्गदर्शन में करैरा के द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश एवं तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने करैरा स्थित लिटिल आइंस्टीन बचपन स्कूल में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया। शिविर में न्यायधीश श्री सक्सेना ने छात्र-छात्राओं को डॉल (गुडयि़ा) को हाथ में पकड़ कर उसके माध्यम से गुड टच-बैड टच के बारे में विस्तार से समझाया। न्यायाधीश ने प्राथमिक स्तर तक के छात्र-छात्राओं को अवगत कराया कि प्रेम पूर्वक उनके शरीर को माता-पिता, भाई-बहन, शिक्षक या अन्य कोई भी अच्छी दृष्टि से स्पर्श व बुरी दृष्टि से स्पर्श करता है, तो उस में अंतर है। जो आप लोगों को समझ आना चाहिए, यदि कोई बुरी दृष्टि से स्पर्श करता है तो सबसे पहले माता-पिता या शिक्षकों को इसकी सूचना अवश्य दें। न्यायाधीश श्री सक्सेना ने कहा कि बच्चे स्पर्श वाली घटना को कदापि न छुपाये, बल्कि पहली बार में ही अपने निकटतम परिजन को तत्काल बताएं। प्राचार्य भावना गुप्ता की उपस्थिति में बच्चों ने मौलिक जिज्ञासा के अंतर्गत प्रश्न उत्तर भी किए। जिसके सरल भाषा में समाधान भी न्यायाधीश श्री सक्सेना द्वारा किए गए। विद्यालय के आंतरिक निरीक्षण के दौरान सहायक रविंद्र रजक द्वारा विद्यालय में शिकायत पेटी न होने पर न्यायाधीश को अवगत कराया। जिस पर प्राचार्य ने तत्काल ही लगाए जाने का आश्वासन दिया। न्यायधीश श्री सक्सेना छात्र छात्राओं के साथ घुलते मिलते अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव भी साझा किये। इस अवसर पर पैरालीगल वॉलिंटियर अनिल राय, निहाल लाहोरी, राम प्रसाद वर्मा, विद्यालय की शिक्षिका मनीषा पाठक, पूनम गुप्ता, स्वाति गुप्ता, बंदना, विकास गुप्ता, संजय, मुकेश सहित छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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