शिवपुरी। जैसे मानव जीवन साहित्य की पहली पाठशाला है उसी तरह हमारी मासिक गोष्ठियां भी साहित्य की पाठशाला में बदल सकती हैं बशर्ते हम उन्हें सीखने सिखाने के माध्यम में बदल सकें, हम कोई नया विचार नई भाषा के साथ गोष्ठी से वापिस लौटें तो यह भी हमारे लिए एक उपलब्धि होगी। उक्त विचार गत दिवस मध्य प्रदेश लेखक संघ जिला इकाई शिवपुरी के द्वारा दुर्गा मठ में आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में आयोजन की अध्यक्षता कर रहे व्यंग्यकार डॉ.महेन्द्र अग्रवाल ने व्यक्त किये। आयोजन में वरिष्ठ गजलकार रफीक इशरत ग्वालियरी मुख्य अतिथि एवं नवगीतकार विनय प्रकाश जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बसंत श्रीवास्तव के संचालन में गोष्ठी में सर्व श्रीं भगवान सिंह यादव ने दिवंगत गायक सहगल की पुण्यतिथि पर उनका विस्तृत परिचय दिया।नवोदित कवि जसमन मौर्य ने आरक्षण पर अपनी बात रखी वहीं सत्तार शिवपुरी और राजकुमार चौहान ने हास्य व्यंग्य की कवितायेंं प्रस्तुत कीं।राकेश मिश्रा ने कुंडलियां एवं श्रीमती कल्पना सिनोरिया सहज व श्रीमती उर्वशी गौतम गीत व मुक्तक पढकर वातावरण को सरस बनाया।विनय प्रकाश जैन नीरव के सामयिक गीत के साथ राधेश्याम सोनी,याकूब साबिर ,रफीक इशरत ग्वालियरी, डॉ.महेन्द्र अग्रवाल ने आदि ने खूबसूरत गजलों से वर्तमान जीवन की विसंगतियों को उभारा।कार्यक्रम के अंत में संस्था के सचिव राजकुमार चौहान जी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
शिवपुरी। जैसे मानव जीवन साहित्य की पहली पाठशाला है उसी तरह हमारी मासिक गोष्ठियां भी साहित्य की पाठशाला में बदल सकती हैं बशर्ते हम उन्हें सीखने सिखाने के माध्यम में बदल सकें, हम कोई नया विचार नई भाषा के साथ गोष्ठी से वापिस लौटें तो यह भी हमारे लिए एक उपलब्धि होगी। उक्त विचार गत दिवस मध्य प्रदेश लेखक संघ जिला इकाई शिवपुरी के द्वारा दुर्गा मठ में आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में आयोजन की अध्यक्षता कर रहे व्यंग्यकार डॉ.महेन्द्र अग्रवाल ने व्यक्त किये। आयोजन में वरिष्ठ गजलकार रफीक इशरत ग्वालियरी मुख्य अतिथि एवं नवगीतकार विनय प्रकाश जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बसंत श्रीवास्तव के संचालन में गोष्ठी में सर्व श्रीं भगवान सिंह यादव ने दिवंगत गायक सहगल की पुण्यतिथि पर उनका विस्तृत परिचय दिया।नवोदित कवि जसमन मौर्य ने आरक्षण पर अपनी बात रखी वहीं सत्तार शिवपुरी और राजकुमार चौहान ने हास्य व्यंग्य की कवितायेंं प्रस्तुत कीं।राकेश मिश्रा ने कुंडलियां एवं श्रीमती कल्पना सिनोरिया सहज व श्रीमती उर्वशी गौतम गीत व मुक्तक पढकर वातावरण को सरस बनाया।विनय प्रकाश जैन नीरव के सामयिक गीत के साथ राधेश्याम सोनी,याकूब साबिर ,रफीक इशरत ग्वालियरी, डॉ.महेन्द्र अग्रवाल ने आदि ने खूबसूरत गजलों से वर्तमान जीवन की विसंगतियों को उभारा।कार्यक्रम के अंत में संस्था के सचिव राजकुमार चौहान जी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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