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Wednesday, July 29, 2020

शिवपुरी में पौष्टिक भोजन को तरसते कोरोना पॉजीटिव मरीज!

 
आइसोलेटेड मरीज से ऐसे मिल रहे है परिजन, जैसे जेल में कर रहे हों मुलाकात

शिवपुरी। कोरोनाकाल के इस दौर ने मनुष्य को मनुष्य से काफी दूर कर दिया है यह इसलिए क्योंकि इन दिनों जो भी कोरोना पॉजीटिव  मरीज आईसोलेटड होकर जिला चिकित्सालय में भर्ती है उन मरीजों से उनके परिजनों की मुलाकात ऐसे हो रही है जैसे वह कोई गुनाहगार हो और अपने ही परिजनों से मिलने के लिए वह जेल में कैदी से मिलने आए हों, ऐसा प्रतीत होता है हालांकि यह कोरोना संक्रमण का प्रभाव ही है कि आज मनुष्य को एक-दूसरे से इतना दूर कर दिया है कि वह उसके संपर्क में आना नहीं चाहता,

 यही कारण है कि कोरोना के वार्ड रूप में किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है और यदि कोई प्रवेश करता है तो उसे पीपीई किट पहनना आवश्यक है तब कहीं जाकर वह अपने परिजनों से मिल सकता है बात कर सकता है उसके साथ बैठ सकता है। इन सब हालातों के बाबजूद भी कोरोना वार्ड में मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान कोरोना मरीज लगा रहे है बताया गया है कि जो मरीज आईसोलेटेड भर्ती होकर अपना उपचार करा रहे है उन्हें पौष्टिक भोजन तक नसीब नहीं हो रहा जबकि शासन की ओर से एक-एक मरीज पर करीब 5 हजार रूपये प्रतिदिन का खर्चा हो रहा है बाबजूद इसके मरीजों को उचित भोजन नहीं मिल रहा। इसके साथ ही कई मरीज तो गंदगी तक की बात कहते है कि आईसोलेटड रूम तक में साफ-सफाई का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस तरह अन्य शिकायतें भी लोगों की है।

बता दें कि इन दिनों कोरोना काल भर्ती मरीजों को पौष्टिक आहार नहीं मिल रहा है जिसके चलते मजबूरन जिला चिकित्सालय के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीज के परिजन अपनी जान जोखिम में डालकर अपनों के बीच पहुंचकर घर का बना भोजन देने को मजबूर है जबकि कोरोना पीडि़त मरीजों के लिए शासन की ओर से ही प्रतिदिन 5 हजार रूपये से अधिक का खर्चाा खाने-रहने और दवाईयों पर किया जा रहा है बाबजूद इसके अपनों की जान की खातिर परिजन यह अपनी जान पर खेलकर परिजनों के लिए भोजन पहुंचाने को मजबूर है। 

भले ही शासन प्रशासन की कोरोना पॉजिटिव को लेकर डाइट को लेकर कोई भी गाइडलाइन हो लेकिन तय मापदण्ड के तहत अस्पताल प्रबंधन वह डाइट उन तक नही पहुचा रहा है और यह बात जब कोरोना पॉजिटिव अपने परिजनों को बताते है। तब वे यह जानते हुए भी कि कोरोना पॉजिटिव से मिलना कितना खतरनाक है वावजूद इसके वो उन तक खाना पहुचाने उन तक पहुँचने पहुंच जाते है जिसके चलतते वह संबंधित भी कोरोना संक्रमण का शिकार हो सकता है लेकिन अपने परिजनों की सुध-बुध और स्वास्थ्य कारणों के चलते वह उन्हें भोजन पहुंचा रहा है। 

ऐसा नहीं हैकि इस ओर जिला चिकित्सालय प्रबंधन को अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए हालांकि मरीज के प्रवेश पर यहां प्रतिबंध लगा रखा है बाबजूद इसके कई मरीज ऐसे है जिन्हें सुबह नाश्ता, दिन में भोजन और सायं को चाय सहित रात्रि भोजन चाहिए, लेकिन अस्पताल की जो डाईट मरीजों को दी जाती है उससे वह संतुष्ट नहीं जिसके चलते अपने परिजनों के द्वारा घर से बना हुआ भोजन मंगाकर वह अपनी पूर्ति कर रहे है।

14 दिनों तक होना पड़ता है आईसोलेटे

देखा जाए तो कोई भी कोरोना मरीज हो यदि वह इस संक्रमण का शिकार हो गया है तो उसे 14 दिनों के लिए अस्पताल में आईसोलेटेड होना पड़ता है। ऐसे में अपने घर-परिवार से दूर संबधित रोगी 14 दिनों के लिए एक तरह से बंद कमरे में पैक हो जाता है और उसे देश-दुनिया की कोई जानकारी नहीं मिल पाती, हालांकि मोबाईल से वह संपर्क में रहता है बाबजूद इसके एक कमरे की बंद चारदिवारी से वह बाहर नहीं आ सकता है। ऐसे में इन 14 दिनों को भी मरीजों को अस्पताल में रहकर काटना बड़ा मुश्किल हो रहा है क्योंकि इन 14 दिनों की खुराक भी जो शासन के द्वारा निर्धारित है वह इन मरीजों को नहीं मिल पा रही और उसकी शिकायत भी करें तो फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे में इन हालातों में वह गरीब मजदूर जिसके घर के कमाने वाला कोई सदस्य इस बीमारी का शिकार हो जाए तो उसके अन्य परिजन तो भूंखों मरने की कगार पर पहुंच जाऐंगें।

इनका कहना है-
जिला चिकित्सालय में कोरोना मरीजों के लिए के लिए नियमित भोजन, चाय व आवश्यक पौष्टिक प्रदाय किए जा रहे है साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा जा रहा है कोई परेशानी होती है तो अस्पताल प्रबंधन हमेशा तैयार रहता है।
डा.पी.के.खरे
सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय, शिवपुरी

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