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Monday, November 22, 2021

माता पिता की सेवा करना संतान का प्रथम कर्तव्य : ब्रजभूषण महाराज



श्रीमद् भागवत कथा में ग्राम रिजौदा में पांचवें दिन श्रीगोवर्धन पूजा की बताई महिमा

शिवपुरी-कोलारस के समीप ग्राम रिजोदा में चल रही भागवत कथा के पांचवे दिन गोवर्धन पूजा के उत्सव पर श्री बृज भूषण महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा करना ही बालकों का प्रथम कर्तव्य है एवं संतान का परम धर्म है माता-पिता को जो दुख देता है वह पुत्र नरक गामी होता है अगर पुत्र के पास धन है वह संपन्न हैं तो माता-पिता की सेवा जरूर करें अन्यथा जो उसके पास है उसी से माता पिता की सेवा करें अगर पुत्र ऐसा नहीं करता तो नर्क गामी होता है एवं मरने के बाद में यमदूत उसे उसी का ही मांस खिलाते हैं। 

आचार्य जी ने कहा कि पृथ्वी के भगवान तो माता.पिता हैं जिन्होंने जन्म दिया है इसलिए सर्वप्रथम उनकी सेवा करें संतान का यही सर्वश्रेष्ठ धर्म है आचार्य जी ने भागवत कथा के प्रसंग में सुंदर भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया और उन्होंने बताया कि भगवान धर्म की मर्यादा स्थापित करते हैं और अपने भक्तों को आनंद देने के लिए अवतार लेते हैं। आचार्य जी ने माखन चोरी लीला के माध्यम से बताया कि गोपियां कोई साधारण स्त्री नहीं थी बल्कि गोपियां बहुत बड़ी संत थी पूर्व जन्म में महात्मा थी जिन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान को प्राप्त किया। 

भगवान का सानिध्य प्राप्त किया आचार्य जी ने ब्रह्मा मोह लीला का वर्णन किया और उन्होंने बताया कि भगवान की लीला ऐसी है कि ब्रह्मा जी को भी मोहित कर सकती है तो हम तुच्छ मनुष्य मोहित हो जाएं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। आचार्य जी ने चीर हरण लीला का सुंदर प्रसंग सुनाया और उन्होंने बताया कि चीर हरण का अर्थ है वस्त्र हरण भगवान ने जो वस्त्र चुराएं थे वे हमारे जैसे वस्त्र नहीं थे वह तो कामरूपी वस्त्र क्रोध रूपी वस्त्र अहंकार रूपी वस्त्र कपट रूपी वस्त्र थे। इन वस्त्रों को भगवान ने चुराया है। 

आचार्य जी ने सुंदर कथा के माध्यम से सुंदर भजन गाकर के कथा का मधुर गान किया कथा सुनने के लिए आसपास के सभी ग्रामीण पहुंच रहे हैं कथा 25 नवंबर तक होगी एवं इस कथा का आयोजन नवल किशोर राठौर रिजौदा वाले करवा रहे हैं।

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