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𝙎𝙝𝙞𝙫𝙥𝙪𝙧𝙞 𝙆𝙝𝙖𝙗𝙖𝙧

Tuesday, May 26, 2026

खाली घड़ों के साथ सड़क पर उतरी सहरिया क्रांति सहरिया समाज, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे आदिवासी परिवार


बच्चों के हाथों में किताबें नहीं, पानी की कट्टियां दिखीं, एसडीएम ने 24 घंटे में व्यवस्था का दिया आश्वासन

शिवपुरी। सहरिया क्रांति सामाजिक आंदोलन के बैनर तले मंगलवार को सैकड़ों आदिवासी महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे सिर पर खाली घड़े, बाल्टियां और पानी की कट्टियां लेकर सड़क पर उतर आए। उनका दर्द सिर्फ इतना था कि उन्हें जीने के लिए पानी चाहिए। गड़ीबरोद कॉलोनी में रहने वाले करीब 100 सहरिया आदिवासी परिवार पिछले दो वर्षों से भीषण पेयजल संकट झेल रहे हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि गरीब परिवारों को पीने का पानी भी अब खरीदना पड़ रहा है। जिन परिवारों के पास दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल है, वे हर महीने 150 रुपए देकर पानी खरीदने को मजबूर हैं। यह दृश्य केवल पानी की कमी का नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक बन गया है।
प्रदर्शन के दौरान सबसे मार्मिक तस्वीर उन छोटे बच्चों की रही, जो स्कूल जाने की उम्र में सुबह से शाम तक पानी की तलाश में गलियों और रास्तों पर भटकते दिखाई दिए। किसी के हाथ में घड़ा था तो कोई खाली कट्टी लेकर पानी की उम्मीद में इधर-उधर घूम रहा था। महिलाओं ने बताया कि कॉलोनी में बोर तो किए गए, लेकिन बिजली लाइन काट दिए जाने से मोटर बंद पड़ी है और जल सप्लाई पूरी तरह ठप हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन ने नल-जल योजना के तहत पाइप लाइन तो बिछा दी, लेकिन उसे कभी चालू ही नहीं किया गया। सहरिया आदिवासियों ने आरोप लगाया कि कई बार पंचायत और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। लगातार उपेक्षा से आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर ज्ञापन लेने पहुंचे एसडीएम ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि 24 घंटे के भीतर गांव में पानी की व्यवस्था शुरू कराई जाएगी और बंद पड़ी लाइन को चालू कराने की कार्रवाई की जाएगी।

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