शिवपुरी- जिले के झांसी रोड़ स्थित मडीखेडा डैम में डूवने के वाद अमोला ग्राम विस्थापित हुआ, इसके चलते हजारों ग्रामीण मजवूरी में गांव छोड़कर नये अमोला के साथ आसपास के गांव और कस्बों शहरों मैं जा वैसे लेकिन गांव से लगाव के चलते एवं अपने देवी देवताओं को पूजने दूर दूर से आते रहे।विस्थापन के वाद गांव के मंदिरों के भगवान श्री राम दरबार सहित,मैया एवं शंकर जी यहां वहां, पुन: स्थापना के कारण अन्य स्थानों पर शाषन की नीति और उपेक्षा की शिकार होती रहीं। आखिर कुछ समय पूर्व ग्राम वासियों ने निर्णय लिया कि हम और हमारे भगवान,देवी देवता, यहीं रहेंगे चूकि हम सवकी आष्था अपने पैतृक मिट्टी से जुडी है अत: निर्णय हुआ कि शाषन और जनप्रतिनिधियों का इंतजार न करते हुए स्वयं सार्वजनिक सहयोग से मंदिर निर्माण कराया जाकर अपने आराध्य देवी देवताओं भगवान की पुन: स्थापना पूर्व ग्राम मैं करेंगे। इसी क्रम में आज श्रीराम दरबार के साथ शिव परिवार और प्राचीन पीपल वाली मां दुर्गा की स्थापना के साथ पांच दिवसीय महायज्ञ भी संपन्न हुआ जिसमें दूर दूर शहरों से एवं विस्थापित गांव और आसपास के गांव से हजारों भक्त शामिल हुए और यज्ञ संपन्न के साथ ही कन्या भोजन के वाद हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन अमोला पूर्व वासियों द्वारा सार्वजनिक रुप से संपन्न हुआ जिसमें सेठ संतोष नीखरा करैरा वालों की प्रमुख भूमिका रही।
शिवपुरी- जिले के झांसी रोड़ स्थित मडीखेडा डैम में डूवने के वाद अमोला ग्राम विस्थापित हुआ, इसके चलते हजारों ग्रामीण मजवूरी में गांव छोड़कर नये अमोला के साथ आसपास के गांव और कस्बों शहरों मैं जा वैसे लेकिन गांव से लगाव के चलते एवं अपने देवी देवताओं को पूजने दूर दूर से आते रहे।विस्थापन के वाद गांव के मंदिरों के भगवान श्री राम दरबार सहित,मैया एवं शंकर जी यहां वहां, पुन: स्थापना के कारण अन्य स्थानों पर शाषन की नीति और उपेक्षा की शिकार होती रहीं। आखिर कुछ समय पूर्व ग्राम वासियों ने निर्णय लिया कि हम और हमारे भगवान,देवी देवता, यहीं रहेंगे चूकि हम सवकी आष्था अपने पैतृक मिट्टी से जुडी है अत: निर्णय हुआ कि शाषन और जनप्रतिनिधियों का इंतजार न करते हुए स्वयं सार्वजनिक सहयोग से मंदिर निर्माण कराया जाकर अपने आराध्य देवी देवताओं भगवान की पुन: स्थापना पूर्व ग्राम मैं करेंगे। इसी क्रम में आज श्रीराम दरबार के साथ शिव परिवार और प्राचीन पीपल वाली मां दुर्गा की स्थापना के साथ पांच दिवसीय महायज्ञ भी संपन्न हुआ जिसमें दूर दूर शहरों से एवं विस्थापित गांव और आसपास के गांव से हजारों भक्त शामिल हुए और यज्ञ संपन्न के साथ ही कन्या भोजन के वाद हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन अमोला पूर्व वासियों द्वारा सार्वजनिक रुप से संपन्न हुआ जिसमें सेठ संतोष नीखरा करैरा वालों की प्रमुख भूमिका रही।

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