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Monday, September 14, 2026

सलाखों के बीच लगा 'अल्पविराम", बंदियों ने खुद से किया संवाद


सर्किल जेल शिवपुरी में '30 दिन 30 कार्यशालाएंÓ अभियान की 14वीं कार्यशाला सम्पन्न, 50 बंदियों ने किया सहभागिता

शिवपुरी। आनंद विभाग शिवपुरी द्वारा सितंबर माह में आयोजित '30 दिन 30 कार्यशालाएंÓ अभियान के अंतर्गत आज सर्किल जेल शिवपुरी में 14वीं अल्पविराम कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में लगभग 50 जेल बंदियों ने सहभागिता की। कार्यशाला के माध्यम से बंदियों ने अपने जीवन के अनुभवों पर ठहरकर विचार किया और आनंद, मदद, क्षमा तथा रिश्तों के महत्व को समझने का प्रयास किया।
कार्यशाला का शुभारंभ 'इतनी शक्ति हमें देना दाताÓ प्रार्थना से हुआ। इसके पश्चात परिचय सत्र में राजेश पटेल ने राज्य आनंद संस्थान के परिचय एवं उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

कार्यशाला के अगले सत्र 'आनंद की ओरÓ में मास्टर ट्रेनर अभय कुमार जैन ने प्रतिभागियों को स्वयं के जीवन में आनंद को खोजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ चर्चा करते हुए जीवन में आनंद बढऩे और घटने के कारणों पर 'अल्पविरामÓ देकर आत्ममंथन कराया। इसके बाद मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने चार महत्वपूर्ण प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने जीवन का लेखा-जोखा तैयार कराया। इसमें नि:स्वार्थ भाव से किसी की मदद करना, स्वयं को मिली मदद को याद करना, किसी को दिए गए दु:ख के लिए क्षमा मांगना तथा दूसरों को क्षमा करने जैसे भावों पर अल्पविराम दिया गया। प्रतिभागियों ने अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन भावों पर ठहरकर विचार करने से मन में सकारात्मकता और आत्मीयता का अनुभव होता है। कार्यशाला के अगले सत्र में ईएनबी से एम. टोंगपांग ने प्रतिभागियों को जीवन में रिश्तों के महत्व से परिचित कराया। उन्होंने रिश्तों के टूटने और जुडऩे के कारणों पर अल्पविराम देकर प्रतिभागियों को अपने संबंधों पर विचार करने का अवसर दिया। 

इस दौरान प्रतिभागियों ने अपने जीवन के रिश्तों से जुड़े अनुभव साझा किए और बताया कि प्रेम, संवाद, समझ, क्षमा और विश्वास जैसे भाव रिश्तों को मधुर एवं मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यशाला के दौरान यह संदेश उभरकर सामने आया कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति कुछ पल ठहरकर अपने विचारों, व्यवहार और बीते अनुभवों को देखे तो बदलाव की शुरुआत भीतर से की जा सकती है। यही ठहराव 'अल्पविरामÓ व्यक्ति को स्वयं से संवाद करने और जीवन को बेहतर दिशा देने का अवसर देता है।

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