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Tuesday, August 25, 2026

आईटीआई छात्रों ने कलेक्टे्रट पहुंचकर प्रैक्टिकल में फैल करने पर जताई आपत्ति, कार्यवाही की मांग


2500 विद्यार्थियों की परीक्षा पर उठे सवाल, फेल करने की धमकी के छात्रों ने लगाए आरोप

शिवपुरी। जिले की विभिन्न निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (प्रायवेट आईटीआई) के करीब 2500 विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विद्यार्थियों ने जिला कलेक्टर को आवेदन देकर परीक्षा की व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों, रॉ-मटेरियल के वितरण, मूल्यांकन प्रक्रिया और घोषित परिणामों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रायोगिक परीक्षा के दौरान उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया और कुछ विद्यार्थियों को कथित रूप से प्रैक्टिकल परीक्षा में फेल करने की बात कही गई।

मामले को गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि आवेदन के अनुसार जिले की विभिन्न निजी आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे करीब 2500 विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा के लिए शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, शिवपुरी को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। परीक्षा के दौरान प्रतिदिन लगभग 400 विद्यार्थियों की परीक्षा आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परीक्षा केंद्र पर विद्यार्थियों के लिए निर्धारित संसाधन उपलब्ध थे या नहीं और उनका मूल्यांकन निर्धारित नियमों के अनुसार निष्पक्ष तरीके से किया गया या नहीं।

छात्रों ने प्रैक्टिकल में फेल करने की धमकी के लगाए आरोप
कलेक्टर को दिए आवेदन में छात्रों ने सबसे गंभीर आरोप मानसिक दबाव को लेकर लगाया है। आवेदन के मुताबिक प्रायोगिक परीक्षा के दौरान परीक्षा नियंत्रण कक्ष से संबंधित व्यक्तियों द्वारा विद्यार्थियों से कथित रूप से कहा गया कि उन्हें प्रायोगिक परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा। विद्यार्थियों का कहना है कि इस तरह के कथित दबाव के कारण कई विद्यार्थी भय और मानसिक तनाव की स्थिति में परीक्षा देने के लिए मजबूर हुए। आवेदन में मांग की गई है कि संबंधित विद्यार्थियों के स्वतंत्र बयान लिए जाएं और जांच की जाए।

परीक्षा की व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल
आवेदन में परीक्षा की व्यवस्थाओं को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि करीब 2500 विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की गई और प्रतिदिन लगभग 400 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। ऐसे में विद्यार्थियों ने सवाल उठाया है कि परीक्षा केंद्र पर इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा कराने के लिए पर्याप्त मशीनें, उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध थे या नहीं। उन्होंने जांच की मांग की है कि परीक्षा केंद्र पर उपलब्ध मशीनरी एवं उपकरणों की वास्तविक संख्या कितनी थी और उनकी वास्तविक कार्यशील क्षमता कितने विद्यार्थियों की परीक्षा कराने की थी।

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