-मुददा-जबाब दो-
महज योजनाओं के कहने भर नहीं बल्कि क्रियान्वयन से हासिल होता है जनता का विश्वासन
शिवपुरी- यं तो इस समय चुनावी मौसम है और अभी-अभी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तीन राज्यों की जीत के बाद कांग्रेसी जहां उत्साह से लवरेज है तो वहीं दूसरी ओर अब लोकसभा में इन्हीं कांग्रेसियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। चूंकि विधानसभा चुनाव को हुए करीब 4 माह होने को है लेकिन आज समय लोकसभा चुनावों का है अब जब लोकसभा चुनाव में गुना-शिवपुरी से एक बार फिर कांग्रेस ने सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपना प्रत्याशी घोषित किया है तब आमजन में यह चर्चा आम होने लगी है कि महज योजनाओं के कहने भरे से नहीं बल्कि क्रियान्वयन से जनता का विश्वास हासिल किया जा सकता है और इस लोकसभा में अब जनता स्वयं चर्चाओं में सांसद सिंधिया से क्षेत्र की समस्याओं को लेकर जबाब मांग रही है, क्या जनता की कसौटी पर अपने भविष्य के विकास को लेकर सांसद सिंधिया अपनी नैया पार करेंगें या फिर अपनी अहम जिम्मेदारी कांग्रेस के राष्ट्रीय महाससिव के नाते वह पश्चिमी कांग्रेस को विजयी बनाने में अपना रथ दौड़ाऐंगें फिलहाल बात शिवपुरी में लोकसभा चुनावों को लेकर जनता के प्रमुख मुद्दे चर्चाओं में है। देखना होगा कि इन मुद्दों को लेकर सांसद सिंधिया अपने क्षेत्र में दौरों के समय क्या जबाब देंगें?
बे-रोजगार- गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र की यदि रोजगार में बात की जाए तो हम समझ सकते है कि रोजगार एक बड़ी समस्या के रूप में क्षेत्र में उभरी है और इसे उबार पाने में स्वयं सांसद सिंधिया ने प्रयास भले ही किए हो लेकिन धरातल पर उसके परिणाम आज भी शून्य है। गुना-शिवपुरी के संसदीय क्षेत्र में आज भी युवा जहां अपने रोजगार को लेकर संशय में है तो वहीं एक गरीब तबका, मजदूर वर्ग रोजमर्रा की जिंदगी में दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद करता हुआ नजर आ रहा है। इस बार चुनाव में यह मुद्दा भी जनता के बीच का है जिसका जबाब देना जनता के लिए जरूरी है।
अधूरा विकास- बात यदि विकास की हो तो फिलहाल शिवपुरी विधानसभा के विकराल हालात नजर आते है। उबड-खाबड़ की चौराहा, खुदा पड़ा शहर जहां से उडऩे वाली धूल के कारण क्षेत्र के हजारों लोग इस धूल मिट्टी का सफर करने को मजबूर है। शहर के प्रमुख मार्ग का विकास भले ही हुआ हो बाबजूद इसके आज भी कई क्षेत्र ऐसे है जहां सीवर की खुदाई के कारण वार्डों में खुदाई अधूरी है।
अधर में जलावर्धन- क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया बार-बार अपने संबोधनों में दोहराते है कि उन्होंने सिंध परियोजना को वर्ष 2007 में मंजूर कराया लेकिन आज तक यह योजना क्रियान्वित नहीं हो सकी। करीब 11 वर्ष बाद भी आज नगर के लोग मड़ीखेड़ा का पानी घर-घर तक आने का इंतजार कर रहे है बाबजूद इसके योजना आज भी अधर में है और बजट प्रतिवर्ष बढ़ता ही जा रहा है। वायपास तक आने वाला पानी टंकियों तक नहींं पहुंचा तो टंकियों से घरों तक तो अभी दूर की कोढ़ी साबित हो रहा है।
लटका सीवर प्रोजेक्ट- शहर के विकास की परिकल्पना को लेकर सीवर प्रोजेक्ट भी एक बड़ा अभियान है जहां सीवर लाईन के माध्यम से शहर की गंदूगी को दूर कर शहर से दूर बाहर किया जाए लेकिन यह सीवर प्रोजेक्ट भी अधर में लटका हुआ है आखिकार इन रूके हुए विकास कार्यों को लेकर कहीं ना कहीं क्षेत्र के लोगों में कई तरह के सवाल जन्म ले रहे है। ऐसे में आज भी सीवर प्रोजेक्ट अपने अस्तित्व में कब आएगा यह फिलहाल कहना मुश्किल है।
अभी भी अधर में आधुनिक शिक्षा- गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में शिवपुरी विधानसभा ही नहीं बल्कि संपूर्ण लोकसभा के रहवासियों में निवासतर युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक शिक्षा के लिए मेडीकल कॉलेज, एनटीपीसी और एनपीटीआई व पॉलीटैक्नीकि कॉलेज जैसे बड़े-बड़े महाविद्यालयों की स्थापना हो रही है बाबजूद इसके यह प्रयास भी अभी अधूरे है। मेडीकल कॉलेज का भले ही लोकार्पण हो गया बाबजूद इसके यहां अभी चिकित्सक बनने में समय लगेगा। इसके अलावा एनटीपीसी, एनपीटीआई भी रूके हुए विकास कार्यों में शामिल है।
आधी-अधूरी चिकित्सा- बार-बार मीडिया और क्षेत्र के लोगों के लिए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के मप्र शासन में मंत्री यह कहते नहीं अघाते कि उन्होंने जिला चिकित्सालय में बंद पड़ा ताला खुलकर आईसीयू चालू कर दिया लेकिन क्या आईसीयू ही सारी चिकित्सकी व्यवस्था की जिम्मेदारी है नहीं, अभी भी चिकित्सालय में नियमित चिकित्सकों की उपस्थिति, मरीजों का समुचित उपचार, शासन की योजनाओं को तरसता गरीब वर्ग, रेबीज इंजेक्शन की कमी होना और बार-बार आपाताकालीन स्थिति में मरीजों को जिला चिकित्सालय से बाहर भेजे जाने का घटनाक्रम नियमित जारी है। ऐसे में आधी-अधूरी चिकित्सा व्यवस्था के चलते जनता क्षेत्रीय सांसद से जबाब मांग रही है।

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