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𝙎𝙝𝙞𝙫𝙥𝙪𝙧𝙞 𝙆𝙝𝙖𝙗𝙖𝙧

Wednesday, February 19, 2020

जिसका तन चलता रहे व मन स्थित हो वह संत है: रमाकांत व्यास

सीतापाठा प्रांगण में श्रीमदभागवतकथा के दौरान बही भक्तिगंगा

महाशिवरात्री महोत्सव के दौरान राष्ट्रभक्ति और रामभक्ति पर हुई चर्चा

शिवपुरी। शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग अंतर्गत खनियाधाना के सीतापाठा प्रांगण में आयोजित महाशिवरात्री महोत्सव के दौरान चल रही श्रीमदभागवत कथा के चैथे दिवस ब्यासपीठ से भागवतभूषण पं रमाकान्त ब्यास ने संत की महिमा बताते हुये कहा कि जिसका तन चलता रहे और मन स्थित रहे वह संत है। अमर शहीद चन्द्रशेखर की कर्मस्थली कही जाने वाले सीतापाठा प्रंागण में भव्य मेले के साथ आयोजित कथा के दौरान महाराजश्री ने पृहलाद के चरित्र व भक्ति की कथा को हजारों की संख्या में कथा पाण्डाल में उपस्थित श्रोता श्रद्धालुओं के समक्ष ज्ञानोपदेश देते हुये बताया कि मनुष्य मे जीवन में इच्छा ए प्रयत्न और अनुग्रह होना आवश्यक है। तभी भगवान की भक्ति की जा सकती है। जब हमारी इच्छा होगी और हम उसके लिये प्रयत्न करेंगे तो हमें भगवान का अनुग्रह अवश्य प्राप्त होगा। उन्होंने नवधाभक्ति समझाते हुये कहा कि पहली भक्ति हमें संत पुरूषों की संगत में रहना चाहिये। क्योंकि संत का मन गतिशील होता है और दिशा सही होती है। जिसकी अभेद दृष्टि हो और जो अति से अति सहन करने की क्षमता रखता हो वह संत कहा जा सकता है। उन्होंने संत और साधु की व्याख्या करते हुये कहा कि साधु का वेष होता है परन्तु संत का कोई गणवेष नहीं होता। संत का स्वभाव वस्त्रों से नहीं अपितु विचारों से जाना जाता है। जो भगवान का भजन करे वह साधु और जिसे भगवान याद करें वह संत कहलाता है। कथा के चैथे दिवस महाराजश्री ने संत पुरूष की कई तरह से ब्याख्या करते हुये कहा कि संत सरिता की तरह होना चाहिये। संत कभी एक जगह नहीं रूकता। संत कभी अपने को संत नहीं मानता और संतों का संग करने से ही भक्ति की प्राप्ति होती है। इसके अलावा श्री ब्यास ने भगवान की नवधा भक्ति से श्रद्धालुओं को परिचित कराया। कार्यक्रम के दौरान खनियाधाना के गणमान्य नागरिकगणए अधिकारी कर्मचारीगणए संत महापुरूषए एवं बडी संख्या में महिला पुरूष श्रद्धालुगण कथा पाण्डाल में उपस्थित थे।  

हुआ विशाल आयुष मेगा चिकित्सा शिविर का आयोजन

सीतापाठा खनियांधाना में विशाल आयुष मेगा चिकित्सा शिविर का आयोजन सम्पन्न किया गया जहां लगभग पांच सौ से अधिक रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और रोगियों को नि:शुल्क औषधि वितरण किया गया। शिविर में डाक्टर बी के भार्गव, डाक्टर योगेश शर्मा, श्रीकांत पुरोहित, राजेश खरे,  दीपक पौन्डरीक एवं योगेश रहोरा की अहम भूमिका रही।

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