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Thursday, February 17, 2022

मौलिक अधिकारों से समाज में समानता लाने का हो रहा प्रयास : निपुण सक्सैना


नालंदा अकादमी परिसर में मौलिक अधिकारों को लेकर विद्यार्थियों के साथ हुआ परिसंवाद कार्यक्रम

शिवपुरी-वर्तमान में उच्चतम न्यायलय मौलिक अधिकारों के जरिये समाज मे समानता लाने का भी प्रयास कर रही है, शबरीमाला व नाज फाउंडेशन के मुद्दों पर दिए गए निर्णय इस ओर इंगित करते है, मौलिक अधिकार मानव के विकास यात्रा व भारत की गौरव गाथा के प्रतीक है व कालक्रम में माननीय उच्चतम न्यायलयों के निर्णयों के द्वारा भारत मे मौलिक अधिकारों को और पुष्ट किया गया हैं। मौलिक अधिकारों पर यह परिसंवाद किया नालंदा अकादमी में माननीय सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट निपुण सक्सेना ने जो परिसर में विद्यार्थियों के साथ मौलिक अधिकारों पर परिसंवाद कर रहे थे। 

जिसमे मौलिक अधिकार को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि मौलिक अधिकारों की कटौती करने के काल अर्थात इमरजेंसी, जिसमे किस प्रकार मौलिक अधिकारों का हनन हुआ व माननीय उच्चतम न्यायलय द्वारा किस प्रकार इस काल मे नागरिकों के अधिकारों का रक्षण किया। इस परिसंवाद कार्यक्रम में नालंदा संस्थान के विद्यार्थियों ने भी अपनी मौलिक अधिकारों से सम्बंधित जिज्ञासा को निपुण सक्सैना के समक्ष रखा, जिसके उन्होंने संतुष्टिदायक जवाब भी दिए गए। 

कार्यक्रम के अंत मे नालन्द संस्थान के डायरेक्ट अक्षत बंसल ने कार्य्रकम के लिए निपुण सक्सेना को धन्यवाद अभिवादन किया और उन्हें संस्था की ओर से प्रतीक चिन्ह व गुलदस्ता भी भेंट दिया। इस अवसर पर प्रदीप रावत सर, सुनील सोले व संस्था के अन्य प्रमुख सदस्य भी उपस्थित थे। परिसंवाद में बच्चों ने भी अपनी कई जिज्ञासाओं का समाधान यहां मौलिक अधिकारों के रूप में प्राप्त किया।

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