श्रीमद् भागवत कथा में गजेन्द्र मोक्ष की कथा का कराया श्रवणशिवपुरी-खनियाधाना स्थित सीतापाठा मेला प्रांगण में संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के आज चतुर्थ दिवस में वालयोगी पंडित श्री वासुदेव नंदिनी भार्गव ने गजेंद्र मोक्ष की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि,काल वडा वलशाली होता है,एवं अंत काल मैं याद करने से प्रभु दौड़े चले आते हैं, गजेन्द्र असहाय होकर एक मात्र प्रभू का स्मरण,निर्मल के वल राम,ऐसी भावना से करने लगा,तव प्रभु ने त्वरित उसका उद्धार कर अपना पार्षद भी वना लिया।प्रार्थना गजेंद्र ने की लेकिन उद्धार भगवान ने पहले ग्राह का किया क्योंकि भगवान कहते हैं मैं अपने भक्त का तो हित करता ही हूं, किंतु जो मेरे भक्त की शरणंगति ग्रहण करे ,मैं पहले उस पर कृपा करता हुं । साथ ही समुद्र मंथन की कथा का निरूपण, राम जन्म की कथा और फिर बड़ी धूमधाम से कृष्ण जन्महोत्सव मनाया गया। भागवत जी का क्रम है पहले शिव कथा फिर राम कथा फिर कृष्ण कथा आती है ,क्योंकि शिव कथा सुनकर जीवन में वैराग्य और रामकथा सुनकर मर्यादा आ जाए तब जाकर ही कृष्ण की लीला समझ में आती है।मेला प्रांगण मैं वडी संख्या मैं लोग धर्म लाभ ले रहे हैं।
श्रीमद् भागवत कथा में गजेन्द्र मोक्ष की कथा का कराया श्रवणशिवपुरी-खनियाधाना स्थित सीतापाठा मेला प्रांगण में संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के आज चतुर्थ दिवस में वालयोगी पंडित श्री वासुदेव नंदिनी भार्गव ने गजेंद्र मोक्ष की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि,काल वडा वलशाली होता है,एवं अंत काल मैं याद करने से प्रभु दौड़े चले आते हैं, गजेन्द्र असहाय होकर एक मात्र प्रभू का स्मरण,निर्मल के वल राम,ऐसी भावना से करने लगा,तव प्रभु ने त्वरित उसका उद्धार कर अपना पार्षद भी वना लिया।प्रार्थना गजेंद्र ने की लेकिन उद्धार भगवान ने पहले ग्राह का किया क्योंकि भगवान कहते हैं मैं अपने भक्त का तो हित करता ही हूं, किंतु जो मेरे भक्त की शरणंगति ग्रहण करे ,मैं पहले उस पर कृपा करता हुं । साथ ही समुद्र मंथन की कथा का निरूपण, राम जन्म की कथा और फिर बड़ी धूमधाम से कृष्ण जन्महोत्सव मनाया गया। भागवत जी का क्रम है पहले शिव कथा फिर राम कथा फिर कृष्ण कथा आती है ,क्योंकि शिव कथा सुनकर जीवन में वैराग्य और रामकथा सुनकर मर्यादा आ जाए तब जाकर ही कृष्ण की लीला समझ में आती है।मेला प्रांगण मैं वडी संख्या मैं लोग धर्म लाभ ले रहे हैं।
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