सागर। अपर सत्र न्यायालय श्री डी.पी. सिवाच देवरी जिला सागर की न्यायालय ने नाबालिग पीड़िता से छेड़छाड़ करने के आरोपी ओमप्रकाश दुबे पिता सुरेश कुमार दुबे उम्र 27 वर्ष निवासी खमरिया थाना सांईखेड़ा जिला नरसिंहपुर को पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 अंतर्गत 3 वर्ष का सश्रम कारावास तथा भादवि की धारा 452 के तहत 2 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा से दंडित करने का आदेश पारित किया। अभियोजन की ओर से मामले में पैरवी विशेष लोक अभियोेजक/सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी लक्ष्मी प्रसाद कुर्मी ने की।
मामला इस प्रकार है कि दिनांक 28,10.2016 को फरियादी अभियोक्त्री के बताये अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देवरी में देहाती नालसी लेख की गई कि दिनांक 27.10.16 को फरियादी अपने घर के अंदर लिपाई पुताई कर रही थी, उसकी मां दुकान पर तथा पापा एवं बड़े भाई खेत पर गए थे। दोपहर करीब 12.30 बजे जब वह घर पर अकेली थी तो अभियुक्त ओमप्रकाश घर में घुस आया ओर बुरी नियत से पीछे से पकडकर छेड़छाड़ करने लगा,
जब वह चिल्लाई तो मुंह व गला दबा दिया जिससे गर्दन में चोट आई. चिल्लाने पर पड़ोस के लोग आ गये जिन्हें देखकर ओमप्रकाश दुबे अभियोक्त्री को छोडकर भाग गया जाते समय बोला कि रिपोर्ट की तो जान से खत्म कर दूंगा। फिर फरियादिया को चक्कर आ गए तो उसके मम्मी पापा व भाई देवरी अस्पताल लेकर आए जहां पर देहाती नालसी अंतर्गत भादसं की धारा 458, 354, 323, 506 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण 7/8 लेख कर जांच उपरांत अभियोक्ती की रिपोर्ट अनुसार अपराध पंजीबद्ध कर अनुसंधान में लिया जाकर।
नक्शामौका तैयार किया जाकर आरोपी को गिरफतार कर अभियोक्ती के चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट प्रप्त कर आरोपी के विरूद्ध उपरोक्तानुसार अपराध कारित किया जाना पाए जाने पर अभियोक्ती की आयु 18 वर्ष से कम होने पर अभियोग पत्र विचारण न्यायालय सुश्री उषा उईके के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जहां से अपराध सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होने से उपार्पण द्वारा सत्र न्यायालय सागर को उपार्पित किए जाने पर अंतरण द्वारा विचारण हेतु न्यायालय श्री डी.पी. सिवाच अपर सत्र न्यायाधीश देवरी को प्राप्त हुआ।
जहां अभियोजन ने मामले को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया। माननीय न्यायालय द्वारा उभय पक्ष को सुना गया। न्यायालय द्वारा प्रकरण के तथ्य परिस्थितियों एवं अपराध की गंभीरता को देखते हुए व अभियोजन के तर्कों से सहमत होकर आरोपी ओमप्रकाश दुबे धारा 7/8 पॉक्सो एक्ट के अपराध के लिए 03 वर्ष के सश्रम कारावास व 2000/- रू. का अर्थदण्ड एवं धारा 452 भादवि में 02 वर्ष का सश्रम कारावास व 1000/- रू. का अर्थदण्ड एवं धारा 323 भादवि में 1000/- रू के अर्थदण्ड से दण्डित करने का आदेश दिया
नाबालिग को बहला फुसलाकर दुष्कर्म करने के आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास
सागर। न्यायालय- श्री हेमंत कुमार अग्रवाल, विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट तहसील बीना जिला सागर के न्यायालय ने नाबालिग को बहला फुसलाकर दुष्कर्म करने के आरोपी रवि रजक पिता मनोहर रजक उम्र 29 वर्ष निवासी थाना अंतर्गत बीना जिला सागर को धारा 5/6 पाॅक्सो एक्ट अंतर्गत 20 वर्ष का सश्रम कारावास व 1000 रूपये के अर्थदण्ड, धारा 363 भादवि में 3 वर्ष सश्रम कारावास व 500 रूपये अर्थदण्ड तथा धारा 366ए भादवि अंतर्गत 5 वर्ष का कारावास एवं 500 रूपये अर्थदण्ड से दण्डित करने का आदेश दिया। पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिति एवं उसको हुई शारीरिक एवं मानसिक क्षति को देखते हुए एक लाख रूपये प्रतिकर स्वरूप दिये जाने आदेश माननीय न्यायालय द्वारा प्रदान किया गया। राज्य शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक/सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्यामसुंदर गुप्ता ने की।
जिला अभियोजन सागर के मीडिया प्रभारी सौरभ डिम्हा ने बताया कि दिनांक-26.10.2020 को पीड़िता के भाई ने थाना बीना में रिपोर्ट लेख कराई कि उसकी बहिन स्कूल जाने की कहकर गई थी जो अभी तक घर नहीं आई गाॅंव में आसपास तलाश किया पता नहीं चला कोई अज्ञात व्यक्ति बहला फुसलाकर भगाकर ले गया। उक्त रिपोर्ट पर से थाना बीना में अज्ञात व्यक्ति के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। पीड़िता को 13.11.2020 को पुलिस ने दस्तयाब किया। पीड़िता ने बताया कि आरोपी रवि उसे शादी का कहकर बहला फुसलाकर भोपाल ले गया था और वहाॅं उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ 17-18 दिन तक लगातार गलत काम किया और शारीरिक संबंध बनाये। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर मेडीकल परीक्षण कराया एवं डी.एन.ए. परीक्षण एफ.एस.एल. से कराया जिसमें शारीरिक संबंध बनाये जाने की पुष्टि हुई।
विवेचना उपरांत अभियुक्त के विरूद्ध अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। करीब डेढ़ वर्ष तक न्यायालय में विचारण चला। जहां अभियोजन ने मामले को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया। माननीय न्यायालय द्वारा उभय पक्ष को सुना गया। न्यायालय द्वारा प्रकरण के तथ्य परिस्थितियों एवं अपराध की गंभीरता को देखते हुए व अभियोजन के तर्कों से सहमत होकर आरोपी रवि रजक को 20 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित करने का आदेश दिया। पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिति एवं उसको हुई शारीरिक एवं मानसिक क्षति को देखते हुए एक लाख रूपये प्रतिकर स्वरूप दिये जाने आदेश माननीय न्यायालय द्वारा प्रदान किया गया।

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