मानसिक तनाव से बचने चिकित्सक ने दी महत्वपूर्ण सलाह
शिवपुरी- हमेशा देखने में आया है कि मनुष्य जरा से क्रोध के चलते आवेश में आकर ऐसा कदम उठा देता है जिसका पछतावा उसे बाद में करना पड़ता है, इन हालातों में मनुष्य को कुछ नहीं बल्कि थोड़े से धैर्य को धारण करना है और अपनी बात कहकर मन को हल्का करें तब मन को बड़ी शांति मिलेगी, निश्चित ही क्रोध के समय मन को थामना बड़ा मुश्किल होता है लेकिन यदि पल भर के लिए उस आवेश को त्याग दिया तो जीवन में नई खुशियां मिलेंगी और मन भी प्रफुल्लित होगा। मन के धैर्य को धारण करने की यह अनुकरणीय समझाईश दी प्रसिद्ध एनेस्थिया विशेषज्ञ डॉ.व्ही.सी. गोयल ने जिन्होंने मानसिक तनाव से बचने को लेकर आमजन के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी।
डॉ.व्ही.सी. गोयल ने कई उदाहरणों के माध्यम से बताया कि यदि कभी अपने मन का ना हो तो दूसरे के मन को भी स्वीकार कर लेना चाहिए, कभी कोई झगड़ा हो तो उस पर नियंत्रण कर लेना चाहिए, बड़ों का सम्मान और छोटों का अनादर ना करें, छोटे यदि कुछ कहें तो उसे समझाऐं ना कि उसे डांट-डपट या फिर लताड़ लगाए, घर में सास-बहू को आपस में ताल-मेल बनाकर रखना चाहिए, घर की छोटी-छोटी बातों को आवेश में ना लेते हुए बात करें, विचार लें, और यदि विचार ना मिले, कुछ देर धैर्य रखें, निश्ति ही ऐसा कुछ करने से सभी के मन को बड़ी तसल्ली मिलेगी और मानसिक अवसाद से भी बचा जा सकेगा।
अंत में डॉ.व्ही.सी. गोयल ने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि प्रत्येक मनुष्य को आवेश की नहीं बल्कि विचारों के समावेश की आवश्यकता है इसलिए घर के परिजन, रिश्तेदार, नातेदार, मित्र, शुभचिंतकों से आपसी चर्चा जरूर करें और मन के विचारों को मिलाए ताकि समय रहते इस तरह के अवसाद से बचाया जा सके जो भविष्य में घर-परिवार व समाज के लिए परेशानी का सबब बनें।

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