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Wednesday, July 27, 2022

पिछोर में फिफ्टी-फिफ्टी भाजपा-कांग्रेस के बीच भाजपा से पूनम सोनी व निर्दलीय कपिल मिश्रा का नाम अध्यक्षीय चर्चा में


सहमति नहीं बनने पर ब्राह्मण पर दांव खेलकर अध्यक्ष भूमिका निभा सकते है पूर्व मंत्री एवं पिछोर विधायक केपी सिंह 

शिवपुरी/पिछोर-नगर परिषद पिछोर में इस बार परिषद अध्यक्ष को लेकर फिफ्टी-फिफ्टी यानि 6-6 कांग्रेस-भाजपा के पार्षद निर्वाचित होकर आए है। इन हालातों में यदि दोनों ही पार्टियों के बीच भाजपा से पूनम सोनी व मप्र के गृहमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा के करीबी कपिल मिश्रा का अध्यक्षीय पद के लिए नाम चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां पिछोर के पूर्व मंत्री एवं विधायक केपी सिंह कक्काजू भी यदि कांग्रेस पार्टी में सहमति नहीं बनती है तो वह अध्यक्षीय निर्वाचन को लेकर महती भूमिका निभा सकते है और किंग मेकर बनकर वह अपने पसंदीदा वोट बैंक ब्राह्मण पर दांव खेल सकते है। 

वहीं जनचर्चाओं में भाजपा की ओर से जहां पूनम सोनी तो निर्दलीय तौर पर गृहमंत्री के करीबी कपिल मिश्रा के नाम पर सहमति बनती हुई प्रतीत हो रही है उनके नाम पर किसी कोई ऐतराज भी नहीं है और ना ही विरोध ऐसे में अध्यक्षीय पद के लिए भाजपा प्रत्याशी पूनम सोनी व निर्दलीय कपिल मिश्रा को लेकर सहमति बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। भाजपा-कांग्रेस के बीच निर्णायक के तौर पर भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी में से कोई एक ही इस चुनाव में मैदान मार सकता है। वहीं आशीष चौधरी के नाम का विरोध भी सबदूर सुनाई दे रहा है। इसके साथ ही यहां सहमति ना बनने पर भाजपा नेता प्रीतम लोधी भी अध्यक्षीय भूमिका को लेकर समन्वय बनाने में आ सकते है। 

बताना होगा कि पिछोर में नगर परिषद अध्यक्ष पद को लेकर तीन निर्दलीय मैदान में है सबसे पहले भाजपा के ब्राह्मण समाज के कद्दावर नेता विकास पाठक जिन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया लेकिन भाई निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 214 मतों से जीत दर्ज कर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाजपा पूर्व मंडल उपाध्यक्ष संजीव राजौरिया एवं एवं कपिल मिश्रा ब्राह्मण निर्दलीय प्रत्याशी जोगी भी भाजपा से टिकट की मांग कर रहे थे लेकिन जब भारतीय जनता पार्टी ने इन प्रत्याशियों का टिकट काटा तो वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीतकर नगर परिषद में अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हो गए, अगर देखा जाए तो भाजपा एवं कांग्रेस के पास छह-छह बराबर पार्षद है।

 नगर परिषद अध्यक्ष का रास्ता निर्दलीय प्रत्याशियों के साथ के बिना तय कर पाना संभव नहीं है, यही भाजपा के संभावित अध्यक्ष पद के प्रत्याशी आशीष चौधरी का पार्टी में ही जबरदस्त विरोध है। बता दें कि पूर्व में आशीष चौधरी के पिताजी रमेश चौधरी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव हार चुके हैं, जनता में भी पार्टी के प्रति आक्रोश है और सीधे तौर पर यह माना जा सकता है कि अगर पार्टी स्मिता आशीष चौधरी को प्रत्याशी बनाती है तो आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि ब्राह्मण वोट पिछोर में विधानसभा का निर्णायक वोट बैंक माना जाता है और विधानसभा प्रत्याशी पीतम लोधी के खेमे में इसको एक सुनहरे मौके के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पीतम सिंह के खेमे से निर्दलीयों को साथ मनाने की कयाबद शुरू हो चुकी है 

और ऐसे में एक साधारण नाम सबको प्रभावित कर रहा है जो नाम है भाजपा प्रत्याशी पूनम सोनी जो कि भाजपा की पुरानी नेत्री हैं और कर्मठ एवं लोकप्रिय प्रत्याशी के रूप में वह नगर परिषद की भावी अध्यक्ष हो सकती हैं क्योंकि बुआ के नाम से प्रसिद्ध पूनम सोनी का कोई भी निर्दलीय प्रत्याशी विरोध भी नहीं कर रहा है, वहीं निर्दलीय प्रत्याशी कपिल मिश्रा का नाम भी चर्चाओं में है चूंकि वह गृहमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा के करीबी होकर इस अध्यक्षीय चुनाव में एडी चोटी का जोर लगा रहे है।

 वही कांग्रेस कि कोई प्रतिक्रिया बाजार में नहीं है, प्रतीत होता है कि कांग्रेस इस समय साइलेंट मोड पर चली गई है। लोगों का मानना है कि अगर भाजपा ने अपना फैसला नहीं बदला तो भाजपा बहुमत जुटाने में असमर्थ हो सकती है और सब पर भारी माने जाने वाले क्षेत्रीय विधायक के पी सिंह अपना ब्राह्मण कार्ड खेल कर सभी को चौंका भी सकते है। देखना होगा कि पिछोर नगर परिषद का यह चुनावी ऊंट किस करवट बैठता है। 

1 comment:

  1. चप्पल चोर नेता को बनाना बेकार है जो भाजपा में रहकर भाजपा का विरोध किया था अंतिम विधानसभा चुनाव में

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