कहा- सामाजिक समरसता,स्वदेशी और संस्कार से ही बनेगा सशक्त राष्ट्रशिवपुरी। शहर के नक्षत्र गार्डन में शनिवार रात्रि आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर परम श्रद्धेय पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सामाजिक समरसता, स्वदेशी जागरण, पर्यावरण संरक्षण और कुटुंब प्रबोधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शहर के 46 समाजों के 335 लोगों को संबोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सेवानिवृत्त शिक्षक रामकृष्ण मौर्य द्वारा पंडित शास्त्री को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित करने से हुआ। इस अवसर पर आरएसएस के प्रांत कार्यवाह हेमंत सेठिया, प्रांत प्रचारक विमल गुप्ता और सह प्रांत प्रचारक सुरेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे।
आरएसएस की 100 वर्ष की पूर्णता पर समाज में किए जाने वाले 'पंच परिवर्तनÓ विषयों पर मार्गदर्शन देते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि समाज का उत्थान तभी संभव है जब नागरिक अपने कर्तव्यों, संस्कृति और परिवार के प्रति सजग हों। उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपनाना केवल वस्तु का चयन नहीं बल्कि अपनी जड़ों से जुडऩे और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में पहला कदम है। जो राष्ट्र अपनी संस्कृति और स्वदेशी उत्पादों को सम्मान देता है, वही सच्चे विकास का मार्ग प्राप्त करता है। पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारे लिए संसाधन नहीं बल्कि जीवन का आधार है, इसलिए इसका संरक्षण हर नागरिक का धर्म और कर्तव्य है। पेड़ लगाना केवल हरियाली बढ़ाने का कार्य नहीं बल्कि आने वाली पीढयि़ों को सुरक्षित भविष्य देने जैसा है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को पृथ्वी पर संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य बताया।
सामाजिक समरसता पर बोलते हुए बागेश्वर धाम सरकार ने कहा कि समाज तभी मजबूत होता है जब उसमें ऊँच-नीच, भेदभाव और विभाजन की कोई जगह न हो। समरसता का अर्थ है सभी को साथ लेकर चलना और हर व्यक्ति को सम्मान देना। जब लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं, तभी राष्ट्र मजबूत बनता है। कुटुंब प्रबोधन पर उन्होंने कहा कि सशक्त परिवार ही सशक्त राष्ट्र की नींव होते हैं। परिवार में प्रेम, संस्कार और संवाद जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं। जो बच्चे घर से संस्कार लेकर निकलते हैं,
वही भविष्य में समाज का मार्ग रोशन करते हैं। उन्होंने कहा कि पारिवारिक एकता हर कठिनाई को अवसर में बदलने की क्षमता रखती है। कार्यक्रम में उपस्थित जनों ने बागेश्वर धाम सरकार के विचारों का स्वागत करते हुए उन्हें समाज और राष्ट्र के मार्गदर्शन का प्रकाश स्तंभ बताया।


No comments:
Post a Comment