शिवपुरी-बिहार प्रांत में भगवान महावीर स्वामी जी की जन्म स्थली वैशाली कुंडलपुर में स्थित प्राकृतिक जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान को बिहार सरकार द्वारा उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर कला, संस्कृति एवं संग्रहालय निदेशालय को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है, यह निर्णय केवल प्रशासनिक परिवर्तन नहीं बल्कि इस ऐतिहासिक शोध संस्थान के अस्तित्व को समाप्त करने की दिशा में उठाया गया गंभीर कदम है। प्रेस को दी जानकारी में महेन्द्र जैन भैयन जिला संगठन महामंत्री राष्ट्रभक्त सवर्ण समाज संगठन जिला शिवपुरी ने बताया कि इस संस्थान की संचालन समिति के अध्यक्ष स्वयं बिहार के राज्यपाल होते हैं। इसका शिलान्यास भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी ने 23 अप्रैल 1956 को किया था। यह स्वतंत्र भारत का पहला सरकारी प्राकृत एवं जैन दर्शन शोध संस्थान रहा है। जिसे बंद करने के लिए बिहार सरकार द्वारा यह तर्क दिया गया है कि संस्थान की पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन, पुस्तकालय एवं ग्रंथों के संरक्षण हेतु इसे कला एवं संस्कृति विभाग को स्थानांतरित किया जा रहा है। किन्तु वास्तविकता अत्यंत चिंताजनक एवं भिन्न है। इस संस्थान में कोई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां उपलब्ध नहीं है जिनके डिजिटाइजेशन का आधार लेकर यह निर्णय उचित ठहराया जा सके। बिहार सरकार के मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर शिवपुरी को ज्ञापन दिया गया जिसे अपर कलेक्टर दिनेश शुक्ला ने ग्रहण किया। ज्ञापन का वाचन महेन्द्र जैन भैयन ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्रभक्त सवर्ण समाज संगठन के मुख्य संयोजक शत्रुघ्न सिंह तोमर, मुख्य कार्यकारी संयोजक महेश शर्मा, जिला संयोजक भरत शर्मा, पुरुषोत्तम कांत शर्मा, अतुल सिंह, अशोक शर्मा कूड़ा, विधि संयोजक रोहित दुबे, मीडिया संयोजक वरुण पाराशर, जिला संगठन महामंत्री महेन्द्र जैन भैयन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ शिवपुरी की ओर से जिला संयोजक हरिओम जैन, दिनेश जैन कल्लू भैया, अजय जैन,पवन जैन ठेकेदार, संजय जैन,महेश जैन, दिनेश जैन,शैलेन्द्र जैन, आरती जैन आदि उपिस्थति थे।

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