शिवपुरी-अमर शहीद तात्या टोपे के बलिदान दिवस पर तात्या टोपे पार्क समाधी स्थल पर चल रहे दो दिवसीय शहीद मेले के पहले दिन शाम देश भक्ति एवं धार्मिक गीतों का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वराज संस्थान संचालनालय संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है।कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजयराज सिंह, एसडीएम आनन्द सिंह राजावत, पूर्व विधायक प्रह्लाद भारती, डूडा अधिकारी सौरभ गौड़ ने तात्या टोपे की प्रतिमा पर माल्यर्पण कर दीप प्रज्वलित कर कलाकारों का स्वागत शॉल श्रीफल से किया। मां सरस्वती वंदना से कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम का संचालन हेमलता चौधरी ने किया, जबकि मंचीय व्यवस्था सिंगर मुकेश आचार्य ने की। कार्यक्रम में ग्वालियर से गायक पीयूष तांबे, प्रतीक्षा तांबे व उनकी म्यूजिकल टीम ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति तराने व धार्मिक गीत प्रस्तुत किए। गायक पीयूष तांबे व उनकी टीम के द्वारा ÓÓकान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो कान्हाÓÓ, ''ओ पालनहारे तुम्रे बिन हमरा कोई नहींÓÓ, '''वह मिट्टी के बेटे जो वापस न लौटेÓÓ, ''ए गुजरने वाली हवा जरा, मेरा इतना काम करेगी क्याÓÓ ''संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं कि घर कब आओगेंÓÓ ''सिलसिला यह बात मेरे यूं ही चलना चाहिए मैं रहूं या ना रहूं भारत ये रहना चाहिएÓÓ का मुख्य रूप से गायन किया गया। राष्ट्रगीत बंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
शिवपुरी-अमर शहीद तात्या टोपे के बलिदान दिवस पर तात्या टोपे पार्क समाधी स्थल पर चल रहे दो दिवसीय शहीद मेले के पहले दिन शाम देश भक्ति एवं धार्मिक गीतों का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वराज संस्थान संचालनालय संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है।कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजयराज सिंह, एसडीएम आनन्द सिंह राजावत, पूर्व विधायक प्रह्लाद भारती, डूडा अधिकारी सौरभ गौड़ ने तात्या टोपे की प्रतिमा पर माल्यर्पण कर दीप प्रज्वलित कर कलाकारों का स्वागत शॉल श्रीफल से किया। मां सरस्वती वंदना से कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम का संचालन हेमलता चौधरी ने किया, जबकि मंचीय व्यवस्था सिंगर मुकेश आचार्य ने की। कार्यक्रम में ग्वालियर से गायक पीयूष तांबे, प्रतीक्षा तांबे व उनकी म्यूजिकल टीम ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति तराने व धार्मिक गीत प्रस्तुत किए। गायक पीयूष तांबे व उनकी टीम के द्वारा ÓÓकान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो कान्हाÓÓ, ''ओ पालनहारे तुम्रे बिन हमरा कोई नहींÓÓ, '''वह मिट्टी के बेटे जो वापस न लौटेÓÓ, ''ए गुजरने वाली हवा जरा, मेरा इतना काम करेगी क्याÓÓ ''संदेशे आते हैं हमें तड़पाते हैं कि घर कब आओगेंÓÓ ''सिलसिला यह बात मेरे यूं ही चलना चाहिए मैं रहूं या ना रहूं भारत ये रहना चाहिएÓÓ का मुख्य रूप से गायन किया गया। राष्ट्रगीत बंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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