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Shishukunj

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Saturday, October 26, 2019

प्रांतीय आह्वान पर गरीब, निर्धन-निराश्रितों के बीच पहुंचकर लायन्स साउथ ने मनाई दीवाली

छोटी दीवाली को दिया बड़ी दीवाली का स्वरूप, बांटे वस्त्र की सेवा 
शिवपुरी-लायन्स क्लब 323-ई 1 के प्रांतपाल ला.अशोक ठाकुर के आह्वान पर आज हजारों लायन साथियों के हाथ उठे और वह प्रांतीय आह्वान पर गरीब, निर्धन, निराश्रितों के बीच पहुंचकर दीप पर्व दीपावली को मनाया। प्रांतपाल अशोक ठाकुर ने आज के इस दिन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह सेवा गतिविधि लायन्स क्लब में पहली बार देखने को मिली जब अशोकनगर जिले के मुंगावली से लेकर राजस्थान प्रदेश के गंगानगर पाकिस्तान बॉर्डर तक तक के 185 क्लबों के 7 हजार लायन साथी ने एक दीप हम सभी की ओर से जरूरतमंद को समर्पित हो के उद्देश्य को लेकर छोटी दीवाली को ही बड़ी दीवाली का स्वरूप बनाकर गरीब, आदिवासी परिवारों के बीच दीपावली का यह त्यौहार मिलकर मनाया। शिवपुरी में यह सेवा गतिविधि लायन्स साउथ अध्यक्ष ला.पारस जैन के साथ सौरभ जैन, प्रवीण जैन, सौरभ सांखला, महिपाल अरोरा, राजेन्द्र शिवहरे, लायनेस साउथ अध्यक्षा श्रीमती नीलू जैन, श्रीमती अकिता अग्रवाल, श्रीमती वंदना शिवहरे आदि सभी मिलकर स्थानीय मंगलम् स्थित निराश्रित भवन पहुंचे जहां सभी लायन साथियों ने प्रांतीय आह्वान के तहत गरीब, निर्धन और निराश्रितों के बीच दीप पर्व दीपावली को मनाया और इन सभी के प्रति सेवा कार्य करते हुए इन्हें वस्त्र, सर्दी से बचाव के लिए गर्म वस्त्र व मिष्ठान प्रदान कर दीपावली की खुशियां सभी ने मिलकर मनाई। इस अवसर पर विशेष सहयोग मंगलम् संस्था के सदस्य डॉ.अजय खेमरिया का भी रहा जिन्होंने मंगलम् में संचालित सेवा गतिविधियों के बारे में बताया। इस दौरान अपना प्रांतीय संदेश देते हुए लायन्स प्रांतपाल अशोक ठाकुर ने बताया कि लायनवाद को सार्थक करने के लिए हम आवश्यकता की जगह पहुंचकर उसे सेवा देना चाहते है और दीप पर्व दीपावली भी ऐसा ही पर्व है जिसमें कहीं ना कहीं गरीब  आदिवासी परिवार अपने आप को इस त्यौहार से भले ही दूर समझें लेकिन उसके त्यौहार की पूर्ति हमारा लायनवाद करेगा और इसी क्रम में 26 अक्टूबर को ही बड़ी दीपावली के स्वरूप में छोटी दीपावली संपूर्ण प्रांत में मनाई गई। लायंस प्रांतपाल अशोक ठाकुर ने इस सेवा गतिविधि के प्रति अपने प्रांत के सभी लायनसाथियों के प्रति आभार भी ज्ञापित किया कि सभी ने मिलकर छोटी दीवाली को ही बड़ी दीवाली के स्वरूप में स्वीकार किया और इस दिन के सेवा कार्य को सार्थक किया। 

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