मंशापूर्ण हनुमान मंदिर पर सुदामा चरित के साथ कथा संपन्न
शिवपुरी-भगवान केवल भक्तों के भाव के भूखे हैं भगवान श्री कृष्ण ने दुर्योधन के द्वारा दी हुई छप्पन भोग की प्रसादी सेवाओं का त्याग कर दिया था परंतु सुदामा जी महाराज के लाई हुए चार मीठी चावलों को प्रभु ने प्रेम से स्वीकार उपरोक्त कथन को सत्य साबित किया इसलिए मानव मात्र को दुख या गरीबी में भी प्रभु को भूलना नहीं चाहिए और सदैव अपने कर्तव्यों को पूरा करते हुए भगवान की भक्ति करते रहना चाहिए। उक्त आर्शीवचन श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से दिए आचार्य प्रहलाद जी महाराज ने जो स्थानीय श्री मंशापूर्ण हनुमान जी मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन सप्तम दिवस विश्राम दिवस पर श्री सुदामा जी महाराज की पावन कथा श्रवण कराते हुए बता रहे थे। इस दौरान आचार्य प्रहलाद जी महाराज द्वारा सुदामा चरित कथा के माध्यम से गरीबी में भी प्रभु की भक्ति किस प्रकार की जाती है कि मार्मिक कथा का वृतान्त सुनाया और सुदामा के परिवार व उसके बच्चों के साथ प्रभु परीक्षा की घड़ी को भी बताया साथ ही कहा कि किस प्रकार से भगवान ने अपने परम भक्त सुदामा के लिए अपने राजपाट छोड़कर नंगे पांव वह अपने मित्र की मित्रता को निभाने के लिए दौड़े पड़े, इसलिए जीवन में कभी मित्रों से कपट नहीं रखना चाहिए वह हमारे सदैव सुख-दु:ख के साथी होते है यही मित्रता हमें जब ईश्वर ने सिखाई है तो आप भी अपने जीवन में अच्छे और सच्चे मित्रों को रखें जो आपके सुख-दु:ख में हमेशा शामिल रहे। इस अवसर पर राठौर परिवार द्वारा संगीतमय भजनों के माध्ये से प्रभु भक्ति की गई।

No comments:
Post a Comment