मणिप्रभा श्रीजी महाराज साहब की शिष्याओं ने किया मंगल प्रवेश
शिवपुरी। जैन श्वेताम्बर मंदिर कोर्ट रोड पर प्रवर्तिनी पूज्या श्री विचक्षण श्रीजी म.सा. की विदुषी शिष्या पूज्या श्री मणिप्रभा श्री जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती शिष्याए परम पूज्य हेमप्रभा श्री जी म.सा. आदि ठाणा 5 का मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के बाद आयोजित हुई धर्मसभा में साध्वी जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि पूण्य करना तो बहुत आसान है और हम प्रतिदिन कुछ न कुछ पुण्य अवश्य करते है परन्तु पाप छोडना बहुत कठिन यदि हम पापों को छोडने का प्रयास करें तो हमारे पुण्य तो अपने आप ही प्रबल हो जायेंगे। प्रवेश के दौरान जैन समाज के सभी स्त्री पुरूष ने जैन धर्म के जयकारें लगाकर साध्वी जी के चरण बंदन किये।
जानकारी देते हुये संघ के अध्यक्ष दशरथ मल सांखला ने बताया कि चातुर्मासमास काल के बाद साधु साध्वीओं के विचरण निरंतर जारी है। ईसी क्रम में श्योपुर से होकर शिवपुरी के रास्ते ग्वालियर जा रही साध्वी परमपूज्य हेमप्रभा श्री जी सहित पांच साध्वियों ने आज शिवपुरी प्रवेश किया। उनका प्रवेश जुलूस मुकेश भांडावत के निवास स्थल से जैन श्वेताम्बर मंदिर कोर्ट रोड तक निकाला गया। साध्वी जी द्वारा परमात्मा की बंदना करते हुये मंत्रोच्चारण किया तत्पश्चात एक धार्मिक सभा का आयोजन किया गया।
जानकारी देते हुये संघ के अध्यक्ष दशरथ मल सांखला ने बताया कि चातुर्मासमास काल के बाद साधु साध्वीओं के विचरण निरंतर जारी है। ईसी क्रम में श्योपुर से होकर शिवपुरी के रास्ते ग्वालियर जा रही साध्वी परमपूज्य हेमप्रभा श्री जी सहित पांच साध्वियों ने आज शिवपुरी प्रवेश किया। उनका प्रवेश जुलूस मुकेश भांडावत के निवास स्थल से जैन श्वेताम्बर मंदिर कोर्ट रोड तक निकाला गया। साध्वी जी द्वारा परमात्मा की बंदना करते हुये मंत्रोच्चारण किया तत्पश्चात एक धार्मिक सभा का आयोजन किया गया।
धर्मसभा में साध्वी बैराग्य श्रीजी द्वारा मन दशा का वर्णन करते हुये कहा कि हम अपने बाहरी आवरण को सुधारने में लगे हुये जिसे जलकर एक मु_ी राख में तव्दील हो जाना है और जिस आत्मा को शरीर परिवर्तन करना है उसकी और हमारा कोई ध्यान नहीं है । हमारे अंदर आज भी अहंकार का प्रवेश है यदि हमे वास्तव में मंगल प्रवेश करना है तो पहले अपने अंदर के अहंकार को बाहर निकालना होगा। साध्वी हेमप्रभा श्री जी म.सा. ने साफ शब्दों में कहा कि आज के समय में पूण्य करना तो बहुत आसान है परन्तु पाप को छोडना बहुत कठिन यदि हम पाप के रास्ते को छोड दे तो पुण्य तो अपने आप ही होता जायेगा। एक वृतांत सुनाते हुये उन्होने कहां कि हमारी ग्रहण करने की क्षमता हमारी मनोवृत्ति पर निर्भर करती है उन्होने कहा कि साधु थे सभी प्यासे थे तभी अचानक बहुत तेज बारिश हुई सभी ने अपने अपने कमण्डल वाहर रख दिये और गीले होने से बचने के लिये गुफा में चले गये जब पानी बरसना बंद हुआ तो बाहर आये और अपने कमण्डल को पानी पीने की इच्छा से उठाया तो एक का कमण्डल जल्दवाजी में लुडका रखा होने के कारण पानी नहीं आया, दूसरे कमण्डल में छेद था जिसके कारण पानी बह गया, तीसरे कमण्डल में पहले से ही गंदा था जिसके कारण सारा पानी गंदा हो गया और चौथा कमण्डल स्वच्छ पानी से भरा था इसी प्रकार हम प्रवचन तो सुनते है परन्तु इन कमण्डल की तरह हमारी स्थिति है इसलिये हमे चाहिए कि हम अपने मन रूपी कमण्डल को साफ रखे ताकि हमारे जीवन का लक्ष्य निर्धारित हो सके।
प्रतिदिन होंगे प्रवचन एवं धार्मिक चर्चाए
साध्वी परमपूज्य हेमप्रभा श्रीजी आदि ठााणा चार ने बताया कि वे यहां जितने दिन रहेंगे उतने दिन तक प्रवचन एवं धार्मिक चर्चायें होती रहेगी। इसके लिये समाज मण्डल द्वारा समय का निर्धारण भी किया गया है प्रतिदिन सुबह 9.30 से 10.30 तक प्रवचन और सांय 3 से 4 बजे धार्मिक चर्चाओं के लिये निश्चित किया है। आज रविवार को भक्ताम्बर पाठ होने के कारण प्रवचन प्रात: 10.00 से 10.30 तक चलेंगे।
प्रतिदिन होंगे प्रवचन एवं धार्मिक चर्चाए
साध्वी परमपूज्य हेमप्रभा श्रीजी आदि ठााणा चार ने बताया कि वे यहां जितने दिन रहेंगे उतने दिन तक प्रवचन एवं धार्मिक चर्चायें होती रहेगी। इसके लिये समाज मण्डल द्वारा समय का निर्धारण भी किया गया है प्रतिदिन सुबह 9.30 से 10.30 तक प्रवचन और सांय 3 से 4 बजे धार्मिक चर्चाओं के लिये निश्चित किया है। आज रविवार को भक्ताम्बर पाठ होने के कारण प्रवचन प्रात: 10.00 से 10.30 तक चलेंगे।
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