शिवपुरी/पिछोर-मध्यप्रदेश शासकीय अध्यापक संगठन के प्रांतीय उपाध्यक्ष इरशाद हिंदुस्तानी ने प्रेस को दी विज्ञप्ति में बताया है कि कर्मचारी पूरी जीवन काल शासन की सेवा करता है लेकिन उसके बुढ़ापे का सहारा पेंशन छीन लिया गया है वर्तमान परिवेश में कर्मचारी जब सेवानिवृत्त होता है तो उसको 500 से लेकर 1000 रुपए पेंशन प्रतिमाह प्राप्त होती बड़ा ही सोचनीय प्रश्न और नीति निर्धारक माननीय सांसद महोदय एवं विधायकों को पुरानी पेंशन का लाभ दिया जा रहा है जो 40 साल सेवा करने के बाद 500 से लेकर 1000 रुपए प्राप्त करने वाले कर्मचारी के साथ कैसा व्यवहार जबकि 1 दिन के विधायक बनने पर 82000 पेंशन कर्मचारी के साथ कितना बड़ा अन्याय नई पेंशन विसंगति के रूप में किस तरह से दी जाती है व
ह भी एक अनुपम उदाहरण इसमें प्रतिमा है 10 प्रतिशत राशि कर्मचारी के वेतन से कटती है जबकि पहले 10 और अब 14 प्रतिशत का हिस्सा सरकार देती है लेकिन कर्मचारी का यह हिस्सा यह कटो त्रा एनएसडीएल कंपनी के बाजार भाव में उतार-चढ़ाव के आधार पर तय किया जाता है। वर्तमान में राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री आदरणीय अशोक गहलोत द्वारा लिया गया निर्णय कर्मचारियों के हित में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा जिन्होंने कर्मचारियों की अति महत्वपूर्ण मांगों को ऐतिहासिक फैसला लेकर पूर्ण किया है अब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कर्मचारी जगत आशा करता है कि एक ऐतिहासिक फैसला कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा मात्र पुरानी पेंशन को तत्काल लागू करें जिससे आपका नाम भी मध्यप्रदेश में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जावे।
इनका कहना है-मध्यप्रदेश शासकीय अध्यापक संगठन के प्रांतीय प्रवक्ताआनंद लिटोरिया जी द्वारा कहां गया है कि जिस तरह सेरराजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी द्वारा ऐतिहासिक फैसला कर कर्मचारियों का विश्वास राजस्थान सरकार ने जीता है ठीक उसी प्रकार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय शिवराज सिंह चौहान पेंशन ना देने वाले राज्यों को एक मिसाल कायम करें एवं आईना दिखाएं।
आनंद लिटोरिया
प्रांतीय प्रवक्ता मध्य प्रदेश शासकीय अध्यापक संगठन
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