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Monday, January 8, 2024

राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिवपुरी के साहित्यकारों ने किए शोध आलेख प्रस्तुत


दो दिन चली राष्ट्रीय संगोष्ठी में तीन साहित्यकारों ने की सहभागिता

शिवपुरी- भारत की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था मध्यभारतीय हिंदी साहित्य सभा ग्वालियर द्वारा कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में विश्व को भारत की देन विषय पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया,जिसमे देशभर के मूर्धन्य साहित्यकारों ने विश्व को भारत की देन विषय पर अपने आलेख प्रस्तुत किये।शिवपुरी के तीन साहित्यकारों ने अपने शोध आलेख संगोष्ठी में प्रस्तुत किये। संगोष्ठी का उद्घाटन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर तो समापन कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव अरविंद सक्सेना व लोक सेवा आयोग के सदस्य देवेंद्र मरकाम ने किया,पाथेय अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर ने दिया।

शिवपुरी के प्रमोद भार्गव ने दशावतार के विज्ञान के साथ पुरातन विज्ञान की सुंदर व्याख्या अपने अध्यक्षीय क्रम में प्रस्तुत की और कहा कि भारतीय मान्यताओं में भगवान के दशावतार हुए है,और ये अवतार विश्व को मानव सभ्यता सृष्टि के क्रम को समझाने के लिए है,जिसे कई विदेशी वैज्ञानिकों व शोध कर्ताओं ने भी स्वीकार किया है। शिवपुरी के ही लखनलाल खरे ने पाककला पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि गंभीर से गंभीर बीमारियों के निदान में भारतीय पाक कला सहायक है।कोन्दू के चावल के नियमित उपयोग से कैंसर जैसी बीमारी का इलाज किया जा सकता है,जिसे हम तो भूल रहे है,पंरन्तु विदेशी स्वीकार कर स्वस्थ जीवन जी रहे है। 

शिवपुरी के युवा लेखक आशुतोष शर्मा ने इस अवसर पर आयुर्वेद पर आधारित अपने शोध को प्रकट करते हुए कहा कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बाद विश्व ने भारतीय दर्शन आयुर्वेद को स्वीकार किया है मानव शरीर के लिए उसके महत्व को समझा है,इसी लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारतीय आयुर्वेद संस्थान के साथ मिलकर जामनगर गुजरात मे संस्थान प्रारम्भ किया है, 

तुलसी,गिलोय,अश्वगंधा, मुलेठी जैसी औषधियों से आज सारा विश्व परिचित हुआ है।बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के आयुर्वेदिक औषधियों पर हुए शोध के बादआज सारा विश्व जीवन के लिए अमृत इसे मान चुका है। संचालन डॉ करुणा सक्सेना,वंदना कुशवाह,व्याप्ति मदेकर,जान्हवी नाइक,अंकित अग्रवाल ने किया। आभार सभा के अध्यक्ष डॉ कुमार संजीव ने माना व देश भर के आये साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह प्रदान किये।

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