हजारों की रैली निकाल राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापनशिवपुरी-सहरिया क्रांति सामाजिक आंदोलन के स्थापना दिवस पर हजारों सहरिया आदिवासियों ने एकसाथ अपनी अस्मिता का उद्घोष किया। जिले के विभिन्न गांवों से आए पुरुष, महिलाएं और बच्चे सहरिया क्रांति जिंदाबाद के नारे लगाकर माधव चौक से कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकालकर राष्ट्रपति के नाम 18 बिंदुओं पर आधारित मांगपत्र सौंपा। इस अवसर पर कांग्रेस पार्टी के पूर्व मंत्री केपी सिंह, समाजसेवी संगठन से सर्व ब्राह्मण समाज के युवा जिलाध्यक्ष एड. विशाल भारद्वाज सहित निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने रैली को समर्थन दिया। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि इस आंदोलनों को राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान दिया जाए। कुछ वकीलों ने जनहित याचिका तैयार करने की तैयारी होने की बात कही।
रैली की शुरुआत सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन के आवास पर हुई, जहाँ आदिवासी समुदाय के विशिष्ट गणों ने दिवंगत साथी अनिल आदिवासी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। भावुक लोग आंसू रोकते हुए कह रहे थे कि यह आंदोलन उनके पूर्वजों की जमीनी यात्राओं और प्रताड़ित इतिहास का प्रतिकार है।
एकजुट भीड़ ने हम मांगें हक के अधिकार, बांट रहे हैं योजनाएँ, बांट नहीं पाएंगे जमीन और संविधान का आश्वासन पूरे करें जैसे नारों से शहर की शांति को गूँजित कर दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप में युवा हाथों में झंडा लेकर कदमताल करते दिखे, तो बुजुर्ग आंखों में आक्रोश लिए पीछे पीछे चलते रहे। पूर्व मंत्री केपी सिंह ने अतिथि के रूप में मंच से कहा, सहरिया क्रांति ने आदिवासी चेतना को आवाज दी है। जब तक अंतिम आदमी को न्याय नहीं मिलेगा, यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि आंदोलनकारियों की वैध मांगों पर तुरंत कार्रवाई हो।
प्रदेश अध्यक्ष औतार भाई सहरिया ने हुंकार भरी, हमने तय किया है कि अब नया युग आएगा, जिसमें हमारा समाज सम्मान से जीएगा। हमारी पुकार सुनने तक यह यात्रा रुकेगी नहीं। उन्होंने 18 सूत्री मांगपत्र में बिना पुनर्विचार के आदिवासी भूमिहीनों की जमीन वापसी, भ्रष्टाचार निरोध, राशन-आवंटन में पारदर्शिता, बेरोजगारी पर ठोस योजनाएं, महिला सुरक्षा और शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं की गारंटी शामिल करने का अनुरोध किया। मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में संजय बेचैन ने बताया कि रैली माधव चौक, गांधी चौक, गुरुद्वारा चौराहा होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहाँ उन्होंने निर्धारित समय से पहले ही शांतिपूर्ण तरीके से अपना ज्ञापन सौंप दिया। उन्होंने कहा, हमारी मांगें प्रदर्शन की नहीं, समाधान की मुद्रा में हैं।
ज्ञापन में प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
पुश्तैनी जमीन की वापसी: दबंगों द्वारा जब्ती किए गए भूखंडों की जांच कर आदिवासियों को लौटाया जाए।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता: राशन, उज्ज्वला, कृषि सहायता योजनाओं में भ्रष्टाचार रोधी प्रोटोकॉल लागू हों।
रोजगार अवसर: युवाओं के लिए स्थानीय कौशल विकास केन्द्र और स्वरोजगार योजनाएं स्थापित की जाएँ।
स्वास्थ्य-शिक्षा आधारभूत सुविधाएँ: बस्तियों में प्राथमिक उपचार केन्द्र, नलकूप एवं स्कूल भवनों का निर्माण सुनिश्चित हो।
महिला एवं बाल सुरक्षा: घरेलू हिंसा एवं मानव तस्करी के खिलाफ त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
रैली में सहरिया महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनमें से राम्या सहरिया ने कहा, “सरकार की झूठी घोषणाएँ हमारी ज़िंदगी में कोई बदलाव नहीं लायीं। अब हमें हक़ चाहिए, भीख नहीं।” कई माताएं अपने बच्चों के साथ हाथ में मांगपत्र लेकर चल रही थीं, जिससे आंदोलन का भावनात्मक पहलू और भी तीव्र हो गया।
प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त पुलिस तैनाती की थी, लेकिन रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। कहीं कोई अवरोध नहीं हुआ और पुलिस ने भी संयम बरतते हुए जनआवाज को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता दी।
समापन पर संजय बेचैन ने स्पष्ट कहा, “यह केवल स्थापना दिवस नहीं, आदिवासी समाज के आत्मविश्वास का आग़ाज़ है। हमारा संघर्ष तभी समाप्त होगा जब हमें संविधान में लिखे हक़ पूरे मिलेंगे। सहरिया अब चुप नहीं रहेगा, हम अपनी कहानी खुद लिखेंगे।” दी हुई तारीख से शुरू यह आंदोलन निश्चित तौर पर निर्णायक मोड़ लेगा।


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