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Thursday, February 19, 2026

आध्यात्मिक समृद्धि का मार्ग है संत समागम, खोलता है मोक्ष का द्वार : मुनिश्री श्री सौरभ जी


शिवपुरी पधारे राष्ट्र संत सौरभ मुनि और युवा प्रेरक विज्ञान मुनि

शिवपुरी-सूरत गुजरात से चातुर्मास संपन्न कर शिवपुरी पधारे श्रमण संघ गौरव राष्ट्रसंत श्री सौरभ मुनि जी और युवा पे्ररक श्री विज्ञान मुनि जी ने गुरूवार सुबह पोषद भवन में एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए बताया कि जीवन में पुण्यों से संत समागम का लाभ मिलता है जिससे जीवन में आध्यात्मिक समृद्धि आती है और मोक्ष का द्वार खुलता है। जैन संत सौरभ मुनि जी ने जैन आगम नंदी सूत्र के भावों की अत्यंत ही सुन्दर और सारगर्भित व्याख्या करते हुए जीवन में ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। पोषद भवन ओसवाल गली में प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे तक चल रहे हैं।

संत सौरभ मुनि जी ने बताया कि जैन नंदी सूत्र जैन धर्म का एक अत्यंत प्राचीन ग्रंथ है, जिसे पढऩा शुभ माना जाता है और इससे हमें ज्ञान की प्राप्ति होती है। ज्ञान से हमें बोध होता है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर के अनुसार ज्ञान के पांच प्रकार होते हैं जिन्हें मति, श्रुति, अवधि, मन पार्याय और केवल्य ज्ञान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह ज्ञान हमें शास्त्रों और संतों के संत्संग से प्राप्त होता है। जिससे मन को शांति मिलती है और जीवन को सही मार्ग दर्शन और अहंकार का नाश होता है। संत समागम उस ज्ञान में व्यवहार में उतारने के लिए व्यवहारिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि ज्ञान साधक के मन को शुद्ध करता है और अज्ञान पर विजय प्राप्त कर मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है। उन्होंने व्याख्या करते हुए कहा कि हमारा शरीर जड़ है जबकि आत्मा चेतन्य है। जीवन में आध्यत्मिक मार्ग पर चलने हेतु शरीर और मन पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।

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