श्रीकृष्ण-सुदामा चरित कथा का वर्णन श्रवण कराया, कहा सुदामा जैसा कोई और नहीं कर सकता त्यागशिवपुरी-श्रीविष्णु मंदिर के पास चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्री बृजभूषण महाराज ने कहा सुदामा जैसा भक्त दुनिया में दुर्लभ हैं क्योंकि सुदामा ने जो त्याग किया वैसा त्याग दुनिया में कोई कर नहीं सकता। सुदामा जी के जीवन का त्याग ही भगवान के पूजन का सबसे बड़ा कारण बना, क्योंकि त्याग से मनुष्य श्रेष्ठ बनता है, त्याग से ही ब्राह्मण इस संसार में पूजा जाता रहा है एवं त्याग से ही संतों की पूजा संसार में होती है। बृजभूषण महाराज ने बताया कि सुदामा का त्याग उनकी सबसे बड़ी तपस्या रही इसलिए भगवान ने अपने हाथों से उनके चरण धूलवाए। आचार्य जी ने कथा का प्रसंग में सुंदर 24 गुरुओं की पावन कथा का वर्णन सुनाया और कहा कि दत्तात्रेय ऋषि ने 24 गुरु बनाए एवं हर गुरु से कुछ ना कुछ शिक्षा प्राप्त की, हमको भी हमारे जीवन में शिक्षा ग्रहण करते रहना चाहिए, शिक्षा के बिना मनुष्य जीवन में पशु के समान माना गया है। कथा के अंत में महाराज जी ने संपूर्ण श्रीमद् भागवत कथा को श्रवण कराया और बताया कि श्रीमद् भागवत कथा मोक्ष प्रदान करती है एवं लोगों को मनवांछित फल प्राप्त प्रदान करती है। कथा के अंत में व्यास पूजन किया गया एवं में विदाई गीत गाकर के श्रीमद् भागवत कथा का समापन किया गया। यजमान शांतिलाल गुप्ता परिवार के द्वारा यह भव्य धार्मिक आयोजन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्रीकृष्ण-सुदामा चरित कथा का वर्णन श्रवण कराया, कहा सुदामा जैसा कोई और नहीं कर सकता त्यागशिवपुरी-श्रीविष्णु मंदिर के पास चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्री बृजभूषण महाराज ने कहा सुदामा जैसा भक्त दुनिया में दुर्लभ हैं क्योंकि सुदामा ने जो त्याग किया वैसा त्याग दुनिया में कोई कर नहीं सकता। सुदामा जी के जीवन का त्याग ही भगवान के पूजन का सबसे बड़ा कारण बना, क्योंकि त्याग से मनुष्य श्रेष्ठ बनता है, त्याग से ही ब्राह्मण इस संसार में पूजा जाता रहा है एवं त्याग से ही संतों की पूजा संसार में होती है। बृजभूषण महाराज ने बताया कि सुदामा का त्याग उनकी सबसे बड़ी तपस्या रही इसलिए भगवान ने अपने हाथों से उनके चरण धूलवाए। आचार्य जी ने कथा का प्रसंग में सुंदर 24 गुरुओं की पावन कथा का वर्णन सुनाया और कहा कि दत्तात्रेय ऋषि ने 24 गुरु बनाए एवं हर गुरु से कुछ ना कुछ शिक्षा प्राप्त की, हमको भी हमारे जीवन में शिक्षा ग्रहण करते रहना चाहिए, शिक्षा के बिना मनुष्य जीवन में पशु के समान माना गया है। कथा के अंत में महाराज जी ने संपूर्ण श्रीमद् भागवत कथा को श्रवण कराया और बताया कि श्रीमद् भागवत कथा मोक्ष प्रदान करती है एवं लोगों को मनवांछित फल प्राप्त प्रदान करती है। कथा के अंत में व्यास पूजन किया गया एवं में विदाई गीत गाकर के श्रीमद् भागवत कथा का समापन किया गया। यजमान शांतिलाल गुप्ता परिवार के द्वारा यह भव्य धार्मिक आयोजन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।


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