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Friday, February 6, 2026

वन विद्यालय शिवपुरी में 'अल्पविराम" कार्यशाला: आत्मचिंतन से आनंद की नई दिशा


शिवपुरी।
भागदौड़ भरी दिनचर्या और तनाव से भरे जीवन के बीच मनुष्य अक्सर स्वयं से दूर होता चला जाता है। ऐसे समय में जीवन में एक छोटा-सा अल्पविराम व्यक्ति को फिर से अपने भीतर झांकने, ठहरने और आनंद को पहचानने का अवसर देता है। इसी उद्देश्य के साथ वन विभाग शिवपुरी में एक दिवसीय परिचयात्मक 'अल्पविरामÓ कार्यशाला का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

यह कार्यशाला जिला कलेक्टर रविन्द्र चौधरी के निर्देशन में तथा राज्य आनंद संस्थान के जिला नोडल अधिकारी एवं संयुक्त कलेक्टर जे.पी. गुप्ता एवं वन मुख्य संरक्षक अधिकारी श्रीवास्तव के समन्वय से वन विद्यालय शिवपुरी में आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ जिला संपर्क व्यक्ति अभय जैन द्वारा इतनी शक्ति हमें देना दाता प्रार्थना के माध्यम से किया गया। इसके पश्चात उन्होंने प्रतिभागियों को एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर शांत समय देकर आत्मचिंतन हेतु प्रेरित किया— मेरे जीवन में आनंद क्या है? इस सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और स्वयं के भीतर छिपे आनंद के क्षणों को महसूस किया। वातावरण भावनात्मक, शांत और आत्मीय संवाद से भर गया।

कार्यशाला के अगले सत्र में मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने प्रतिभागियों को चार महत्वपूर्ण प्रश्नों के माध्यम से लाइफ बैलेंस शीट तैयार कराई। इस अभ्यास द्वारा प्रतिभागियों ने अपने जीवन की अब तक की यात्रा को आय-व्यय, लाभ-हानि और अनुभवों के रूप में समझने का प्रयास किया। यह सत्र जीवन को संतुलित दृष्टि से देखने की दिशा में अत्यंत प्रभावशाली रहा। कार्यशाला में उपस्थित आनंदक उदय सिंह राजावत ने 'अल्पविरामÓ कार्यक्रम से अपने जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तन को साझा किया। उनके अनुभवों ने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि छोटे-छोटे ठहराव भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह अनुभव किया कि आनंद कोई बाहरी वस्तु नहीं, बल्कि भीतर की अवस्था है, जिसे पहचानने के लिए कभी-कभी जीवन में एक अल्पविराम आवश्यक होता है।

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