आज से यह कृति लोक की : डॉ.महेन्द्रशिवपुरी। पुस्तक प्रकाशन के बाद पाठकों से जुडऩे के दो तरीके प्रचलित हैं एक विमोचन दूसरा लोकार्पण।विमोचन का अर्थ है बंधन मुक्त होना,आवरण रहित होना जबकि लोकार्पण से आशय किसी वस्तु को समग्र लोक को जगत को अर्पित करने से है, अत: आज से यह कृति समग्र लोक की है। उक्त उद्गार गत दिवस मध्य प्रदेश लेखक संघ इकाई शिवपुरी के द्वारा दुर्गा मठ में आयोजित होली मिलन समारोह में आयोजन की अध्यक्षता कर रहे गजलकार व्यंग्यकार डॉ.महेन्द्र अग्रवाल ने अपनी 38वीं कृति नया व्यंग्य संग्रह दूध का दूध पानी का पानी पाठकों को जारी करते हुए व्यक्त किये।
इस सप्ताह से अमेजन, फिलपकार्ट ,किंडले आदि पर इसकी बिक्री शुरू हो गई है इसलिए औपचारिक रूप से नगर में इसे जारी किया जा रहा हैं। आयोजन में वरिष्ठ गजलकार एवं नवगीतकार गोविंद अनुज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।इससे पूर्व संघ के नए सत्र के सदस्यता अभियान पर व्यापक चर्चा हुई और सदस्यों को प्रादेशिक गोष्ठियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।तदुपरांत बसंत श्रीवास्तव व शिवकुमार राय द्वय के संचालन में गोष्ठी में भगवान सिंह यादव, जसमन सिंह मौर्य, राजकुमार चौहान, राधेश्याम सोनी, याकूब साबिर, संजय शाक्य, कु.सिर्द्धार्भका, निर्मल हरि, रामकृष्ण मोर्य, देवकुमार मोर्य, अजय जैन अविराम ने आदि ने होली के विविध रंगों को अपनी रचनाओं से बिखेरा। इस आयोजन में पिता-पुत्र व पिता-पुत्री का एक साथ काव्य पाठ भी आकर्षण का केन्द्र रहा।कार्यक्रम के अंत में अजय जैन अविराम ने सभी का आभार व्यक्त किया।

No comments:
Post a Comment