मरीज के लिए सुरक्षित है होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति : डॉक्टर प्रमोद बिंदलशिवपुरी-इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ होम्योपैथिक फिजिशियन द्वारा विश्व होम्योपैथिक दिवस पर होम्योपैथी के जनक डॉक्टर सैमुअल हैनिमैन की जयंती का कार्यक्रम वरिष्ठ चिकित्सक डॉ प्रमोद विंदल के निवास महल कॉलोनी श्री बृज धाम पर रखा गया जिसमें डॉक्टर हैनीमैन के जीवन पर प्रकाश डाला गया एवं होम्योपैथी के विषय पर संवाद किया गया।
इस अवसर पर शिवपुरी शहर के होम्योपैथिक चिकित्सा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ कार्यक्रम में आईएसपी जिला अध्यक्ष डॉक्टर गोपाल दंडोतिया ने बताया कि होम्योपैथिक की शुरुआत 1976 में डॉक्टर सैमुअल हैनीमैन द्वारा जर्मनी में की गई थी विश्व के कई देशों में इसका उपयोग होता है लेकिन भारत अग्रणी है यह एलोपैथिक एवं आयुर्वेद की तरह एक चिकित्सक चिकित्सा सुविधा देती है। इस वर्ष थीम दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान में तथा रोगियों को ठीक करने के लिए होम्योपैथी विश्व में प्रयोग की जाने वाली दूसरे नंबर की सबसे बड़ी पैथीं है। विश्व होम्योपैथिक दिवस के अवसर पर डॉ प्रमोद बिंदल, डॉक्टर गोपाल दंडोतिया, डॉ राकेश राठौर,डॉ नृपेंद्र रघुवंशी, डॉ वीरेंद्र वर्मा, डॉ रामकुमार गुप्ता आदि चिकित्सक उपस्थित हुए।
आयुर्वेद की तरह तीन मियाज्म : डॉ. राकेश राठौर
आईआईऐचपी के जिला उपाध्यक्ष डॉ राकेश राठौर ने बताया कि आयुर्वेद की तरह तीन मियाज्म होते हैं आयुर्वेद पद्धति में बीमारी के कारण त्रिदोष बताए गए हैं इसी तरह होम्योपैथी में भी तीन मियाज्म हैँ शोरा,सिफलिस एवं साइकोसिस को बताया गया है जब तक बीमारी की जड़ को ठीक नहीं किया जाता है बीमारी को नहीं हटाया जा सकता है होम्योपैथी में बीमारी को जड़ से ठीक किया जाता है इसलिए इन तीनों मियाज्म के मरीज को चिन्हित कर उचित दवा प्रदान की जाती है.
दुष्प्रभाव रहित है होम्योपैथिक चिकित्सा : निर्पेंद्र रघुवंशी
आईआई एचपी के जिला सचिव डॉ नृपेंद्र रघुवंशी ने बताया की होम्योपैथिक की चिकित्सा पद्धति में किसी भी तरह के दुष्परिणाम नहीं आते हैं मरीज को इसकी इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है यह भ्रांति है कि यह पहले रोग को बढ़ाती है लेकिन यह गलत है यह सुरक्षित व कारगर चिकित्सा पद्धति है।

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