मंदिर पुजारी सुशील भार्गव व दीपक भार्गव ने बताया एकादशी का महत्वशिवपुरी- प्रति 3 से 4 वर्ष के अंतराल में पडऩे वाला अधिक मास का महीना हमेशा दान-पुण्य, धर्म-कर्म के लिए जाना जाता है और इस मास में ही सर्वाधिक रूप से धार्मिक आयोजन होते है, संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा, चार धाम की पुण्य यात्रा सहित अनेकों धार्मिक आयोजन इसी माह में सर्वाधिक रूप से धर्मप्रेमीजनों के द्वारा किए जाते है। अधिक मास में ही पदमा एकादशी जिसे पदमिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, यह एकादशी बड़ी फलदायी होती है, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से साधक को विशेष धर्म लाभ मिलता है. साथ ही जीवन में आ रही कई प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती हैं. इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु की उपासना के साथ-साथ पदमा एकादशी व्रत कथा के पाठ को भी बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
पदमा एकादशी का यह महत्व बताया श्रीविष्णु मंदिर के पुजारी सुशील भार्गव एवं उनके सुपुत्र दीपक भार्गव ने जिन्होंने पदमा एकादशी के अवसर पर मंदिर में दर्शन करने एवं पूजा-पाठ व अन्य धार्मिक आयोजन का धर्मलाभ लेने आए श्रद्धालुओं को कथा का ना केवल महत्व बताया बल्कि उनके जीवन में सुख-समृद्धि, यश, वैभव आए इसे लेकर भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं प्रसंगों के माध्यम से लाभान्वित कराया। यहां कथा का रसपान करने सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु श्रीहरि के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करने विष्णु मंदिर पहुंचे और यहां मंदिर पुजारी द्वारा श्रवण कराई गई कथा को ग्रहण किया। इस एकादशी के महत्व पर भी विस्तृत प्रकाश डाला गया और पराई निंदा से बचते हुए, धर्म-कर्म के क्षेत्र में अग्रणीय रहने का मार्ग मंदिर पुजारी दीपक भार्गव के द्वारा अपने आर्शीवाचनों में बताया गया। यहां अधिक मास के दौरान पदमा एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब विष्णु मंदिर में उमड़ा और सभी ने अपनी-अपनी विधि अनुसार पूजा-पाठ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए। मंदिर में गरीब, निर्धन, निराश्रित आदि की सेवा करते हुए उन्हें ना-ना प्रकार की सामग्री का वितरण श्रद्धालुओं के द्वारा किया गया।


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