श्रीमद भागवत कथा में अग्रवाल पैलेस में उत्साह के साथ मना श्रीकृष्ण-रूकमणी विवाहशिवपुरी-भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह भक्ति, प्रेम और साहस का प्रतीक है यह एक अद्भुत पौराणिक प्रसंग है जिसमें रुक्मिणी, विदर्भ के राजा भीष्म की पुत्री थीं, जो भगवान कृष्ण के गुणों पर मुग्ध होकर उन्हें मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं, रुक्मिणी के माता-पिता उनका विवाह कृष्ण से कराना चाहते थे, लेकिन उनके महत्वाकांक्षी भाई रुक्मणी ने उनकी इच्छा के विरुद्ध उनका रिश्ता शिशुपाल के साथ तय कर दिया, जो श्रीकृष्ण का कट्टर विरोधी था, इस संकट से उबरने के लिए, रुक्मिणी ने एक विद्वान ब्राह्मण के माध्यम से द्वारकाधीश को प्रेम और समर्पण से भरा एक पत्र भेजा।
इसमें उन्होंने कृष्ण से आग्रह किया कि वे आकर उनका हरण कर लें और शिशुपाल से उनका विवाह होने से बचाएं, जिस पर पत्र पाकर श्रीकृष्ण तुरंत अपने रथ पर सवार होकर विदर्भ के लिए निकल पड़े और द्वारका में जब रुक्मिणी देवी मंदिर (अम्बा माता मंदिर) में पूजा करने गईं, तब श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं और शिशुपाल की सेनाओं के बीच से कुशलतापूर्वक उनका हरण कर लिया, रास्ते में शिशुपाल और रुक्मी ने कृष्ण का पीछा किया, लेकिन बलरामजी और यदुवंशियों ने उन्हें हरा दिया, अंतत:, द्वारका पहुँचकर श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विधि-विधान से भव्य विवाह संपन्न हुआ।
भगवान श्रीकृष्ण और रूकमणी का यह मंगल प्रसंग श्रवण कराया परम पूज्य पं. मनोहर जी महाराज ने स्थानीय अग्रवाल पैलेस कोतवाली रोड़ पर कथा यजमान अशोक कुमार-श्रीमती व्ही.एम.अग्रवाल (एडवोकेट), दीपक अग्रवाल एडवोकेट एवं नीरज अग्रवाल न्यायाधीश परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के श्रीकृष्ण-रूकमणी कथा का वृतान्त व्यासपीठ से श्रवण करा रहे थे। इस अवसर पर कथा यजमान परिजनों के द्वारा प्रतीक स्वरूप झांकी के रूप में भगवान श्रीकृष्ण-रूकमणी का विवाह संपन्न कराया गया और कथा यजमान परिजनों के द्वारा भगवान स्वरूपों का पूजन कर पुण्य लाभ अर्जित किया गया। इस अवसर पर कथा में मौजूद श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह और उल्लास के साथ श्रीकृष्ण-रूकमणी विवाह मनाया।

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