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Monday, June 1, 2026

लेखक संघ एवं सिंघल फाउंडेशन ने किया साहित्यिक अनुष्ठान


शिवपुरी।
गत दिवस मध्यप्रदेश लेखक संघ एवं श्री रामकिशन सिंहल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यिक अनुष्ठान का आयोजन दुर्गामठ में किया गया जिसमें हिंदी पत्रकारिता के दो सौ साल पूरे होने के अवसर पर नई गजल के संपादक एवं लेखक डॉक्टर महेंद्र अग्रवाल ने कहा कि आरंभिक दौर में साहित्यकार ही पत्रकारिता किया करते थे और वह सामाजिक परिस्थितियों का तथ्यपरक विश्लेषण एवं निष्पक्ष समाचार देने का प्रयास करते थे, सही सूचनाओं को आम जन तक पहुंचाना उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी। सन 1826 से प्रारंभ पत्रकारिता के विभिन्न युगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नई टेक्नोलॉजी के प्रदुभाव और सोशल मीडिया के ब?ते चलन से बदली हुई आज की पत्रकारिता की दिशा और दशा का भी संकेत किया।

आरंभ में अखलाक खान ने आज के आयोजन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष पूर्ण होने, नूर लखनवी की पुण्यतिथि, अंर्तराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस होने के साथ व सुविख्यात शायर डा. बशीर बद्र के निधन का उल्लेख किया। तंबाकू निषेध दिवस के प्रसंग में पर दिनेश वशिष्ठ ने इसके प्रयोग को कम करने एवं धीरे-धीरे त्यागने का अनुरोध किया। तथा डॉक्टर बशीर बद्र साहब के शेर पढते हुए उन्हें याद किया। वरिष्ठ गीतकार विनय प्रकाश नीरव ने बशीर बद्र की साहित्यिक यात्रा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्हें आम जनता का शायर कहा विनय प्रकाश ने कहा कि दुश्यंत और डॉक्टर बशीर बद्र के शेर राजनेताओं एवं अदबी महफिलों में कोड किए जाते रहे हैं। इससे पूर्व अखलाक खान के संचालन में संपन्न काव्य गोष्ठी में सामाजिक विकृतियों पर उनकी कविता के बाद राधेश्याम सोनी परदेसी ने रुमानी गजल पेश करते हुए कहा सजाएं खूब मिली दिल लगाने की, वो क्या फिर गई नजरें जमाने की। बसंत श्रीवास्तव ने कहा कुछ पल हसीन मेरे बना कभी-कभी करते हो रोज बातें निभाते नहीं हो तुम। राजकुमार भारती ने प्रभावी व्यंग्य रचना की प्रस्तुति दी। साहित्यिक अनुष्ठान के अंत में पद्मश्री से सम्मानित देश-दुनिया के मशहूर शायर डॉ.बशीर बद्र को नमन करते हुए सभी साहित्यकारों ने पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन अखलाक खान एवं आभार दिनेश वशिष्ठ ने अभिव्यक्त किया।

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