अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह पर शक, राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर भी पहुंचेशिवपुरी। भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक स्थली माने जाने वाले विश्वप्रसिद्ध नरवर किले से देश की सबसे बड़ी ऐतिहासिक धरोहर चोरियों में से एक सामने आई है। यहां बीती 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात अज्ञात बदमाश किले की ओपन कचहरी में रखी 16वीं शताब्दी की करीब 3500 किलो वजनी दुर्लभ ऐतिहासिक तोप चोरी कर ले गए। इस घटना ने राज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चोरी पूरी योजना के तहत अंजाम दी गई। बदमाश तोप को गद्दों और रजाइयों में लपेटकर बैरिंग लगी विशेष लोहे की ट्रॉली पर रखकर लगभग तीन हजार फीट नीचे तक ले गए। इसके बाद उसे एक वाहन में लादकर फरार हो गए। घटनास्थल से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप, तोप को घसीटने के निशान तथा किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर वाहन के टायरों के निशान मिले हैं। इस मामले की सूचना पर शिवपुरी एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया मौके पर पहुंची।
कुछ दिनों पहले भी किया था तोप चोरी का प्रयास
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि चोरों ने चोरी की तैयारी कई दिन पहले शुरू कर दी थी। 4-5 जुलाई की रात भी बदमाशों ने इसी तोप को उसके स्थान से नीचे गिरा दिया था, लेकिन अत्यधिक वजन होने के कारण उसे ले जाने में सफल नहीं हो सके। उस समय सुरक्षा गार्डों ने नरवर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद बदमाश पूरी तैयारी के साथ दोबारा लौटे और वारदात को सफलतापूर्वक अंजाम दे गए।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि चोरों ने चोरी की तैयारी कई दिन पहले शुरू कर दी थी। 4-5 जुलाई की रात भी बदमाशों ने इसी तोप को उसके स्थान से नीचे गिरा दिया था, लेकिन अत्यधिक वजन होने के कारण उसे ले जाने में सफल नहीं हो सके। उस समय सुरक्षा गार्डों ने नरवर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद बदमाश पूरी तैयारी के साथ दोबारा लौटे और वारदात को सफलतापूर्वक अंजाम दे गए।
नरवर किले में रखी है सिंधिया परिवार की 14 दुर्लभ तोपें, 1 हुई चोरी
बता दें कि नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ ऐतिहासिक तोपें रखी थीं। चोरी के बाद अब वहां केवल 13 तोपें बची हैं। चोरी गई तोप करीब 5 फीट 10 इंच लंबी और लगभग 30 इंच चौड़ी बताई गई है। कचहरी महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में कछवाह राजाओं ने कराया था, जबकि वर्ष 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के आदेश पर इसका जीर्णोद्धार कराया गया था। यहां रखी तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से निर्मित हैं तथा इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में ऐतिहासिक शिलालेख अंकित हैं।
बता दें कि नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ ऐतिहासिक तोपें रखी थीं। चोरी के बाद अब वहां केवल 13 तोपें बची हैं। चोरी गई तोप करीब 5 फीट 10 इंच लंबी और लगभग 30 इंच चौड़ी बताई गई है। कचहरी महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में कछवाह राजाओं ने कराया था, जबकि वर्ष 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के आदेश पर इसका जीर्णोद्धार कराया गया था। यहां रखी तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से निर्मित हैं तथा इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में ऐतिहासिक शिलालेख अंकित हैं।
2 से 5 करोड़ कीमत हो सकती है तोप, पुलिस ने किया मामला दर्ज
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अवैध एंटीक बाजार में इस तरह की दुर्लभ तोप की कीमत 2 से 5 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसी कारण पुलिस को आशंका है कि इस चोरी के पीछे किसी संगठित अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है। राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने बताया कि ऐतिहासिक तोप चोरी होने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं और पुलिस के साथ संयुक्त जांच की जा रही है। वहीं नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि सुरक्षा गार्डों की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अवैध एंटीक बाजार में इस तरह की दुर्लभ तोप की कीमत 2 से 5 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसी कारण पुलिस को आशंका है कि इस चोरी के पीछे किसी संगठित अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है। राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने बताया कि ऐतिहासिक तोप चोरी होने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं और पुलिस के साथ संयुक्त जांच की जा रही है। वहीं नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि सुरक्षा गार्डों की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी गई है।

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