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Sunday, July 12, 2026

करदाताओं की श्रेणीयों के आधार पर समय-सीमा में सरकार ने किए महत्वपूर्ण बदलाव : अनिल पाराशर


पुरानी टैक्स व्यवस्था खत्म वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 में जारी है आयकर रिटर्न

शिवपुरी- वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इन दिनों आयकर रिटर्न भरे जा रहे है इस संबंध में आयकर को लेकर कुछ आए बदलावों के संबंध में पाराशर एण्ड पाराशर के संचालक अनिल पाराशर ने सभी करदाताओं को यह सुविधा बड़े सरल तरीके से समझाई और आए हुए बदलावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
अनिल पाराशर ने बताया कि आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की प्रक्रिया इन दिनों तेजी से चल रही है, और अब तक 1.7 करोड़ से अधिक करदाता अपना रिटर्न फाइल कर चुके हैं। इस साल आयकर विभाग ने करदाताओं की श्रेणियों के आधार पर समय-सीमा में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, आखिरी समय की तकनीकी दिक्कतों और जुर्माने से बचने के लिए करदाताओं में जल्द से जल्द रिटर्न भरे। श्री पाराशर ने बताया कि आयरक दाखिल करने की अंतिम तिथियाँ (2026-27)करदाता की श्रेणी लागू आईटीआर फॉर्म अंतिम तिथि नौकरीपेशा, पेंशनभोगी और व्यक्तिगत निवेशक आईटीआर-1 और आईटीआर 31 जुलाई 2026, गैर-ऑडिट व्यावसायिक मामले (फ्रीलांसर्रस /छोटे व्यापारी)आईटीआर-3 और आईटीआर-31 अगस्त 2026 (इस वर्ष से बढ़ाई गई)टैक्स ऑडिट वाले व्यावसायिक खाते आईटीआर-3 / आईटीआर5/आईटीआर-31 अक्टूबर 2026 है, समय पर आईटीआर न भरने के नुकसान और जुर्माना को लेकर यदि करदाता निर्धारित समय-सीमा से चूक जाते हैं, तो गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें लेट फीस (जुर्माना) धारा 234एफ के तहत 5,00,000 से अधिक आय होने पर रूपये 5,000 और इससे कम आय होने पर रूपये 1,000 की लेट फीस देनी होगी, इसके अलावा ब्याज के रूप में बकाया टैक्स राशि पर धारा 234ए के तहत 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से अतिरिक्त ब्याज लगेगा। श्री पाराश ने कर दाताओं को पुरानी कर व्यवस्था अब खत्म हो गई है, यदि करदाता समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था का लाभ नहीं ले पाएंगे और अनिवार्य रूप से नई कर व्यवस्था के तहत ही टैक्स देना होगा।

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