आधारित डिवाइस से मोबाइल पर देख सकेंगे ईसीजी रिपोर्ट, हृदय संबंधी असामान्यताओं की पहचान में मिलेगी मददशिवपुरी। जिले के लिए गौरव की बात है कि शिवपुरी के मयंक भार्गव और केतन ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित हार्ट मॉनिटरिंग एवं अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया है। इस तकनीक की मदद से व्यक्ति घर पर ही अपना इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) रिकॉर्ड कर सकेगा और उसकी रिपोर्ट मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से देख सकेगा। जरूरत पडऩे पर यह रिपोर्ट डॉक्टर के साथ भी साझा की जा सकेगी।
बताना होगा कि मयंक भार्गव शिवपुरी जिले की पिछोर तहसील के ग्राम बामोर (डमरौन) के निवासी हैं। उनके पिता पुष्पेंद्र भार्गव एसपी कार्यालय की शाखा डीएसवाईडब्ल्यू (डीएसवायडब्ल्यू) में कार्यरत हैं। मयंक ने अपने साथी केतन के साथ मिलकर विकसित करते हुए इस तकनीक को हृदय संबंधी बीमारियों की निगरानी और समय रहते संभावित असामान्यताओं की पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जिला खेल अधिकारी डॉ.के.के.खरे ने मयंक की नवीन तकनीक पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि निश्चित रूप से शिवपुरी के बामोर (डमरौन) निवासी मयंक भार्गव की इस उपलब्धि से क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा और नवाचार के प्रति रुचि रखने वाले युवाओं को भी प्रेरणा मिल सकती है।
ऐसे काम करेगी यह तकनीकि
इस डिवाइस में तीन प्रोब की सहायता से ईसीजी सिग्नल प्राप्त किए जाते हैं। शरीर पर निर्धारित स्थानों पर लगाए जाने वाले सेंसर हृदय की विद्युत गतिविधियों से संबंधित संकेत रिकॉर्ड करते हैं। इसके बाद रिकॉर्ड किए गए डेटा को मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से देखा जा सकता है। एप में कई महीनों तक का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सुविधा भी दी गई है, जिससे पुरानी और नई रिपोर्ट की तुलना करने में मदद मिल सकती है। मयंक भार्गव ने अपने साथी केतन का यह नवाचार आईओटी, एआई और डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी के समन्वय का उदाहरण है। इस प्रकार की तकनीक भविष्य में घर पर स्वास्थ्य निगरानी, पुराने रिकॉर्ड के प्रबंधन और जरूरत पडऩे पर समय रहते चिकित्सकीय सहायता लेने में उपयोगी साबित हो सकती है।
इस डिवाइस में तीन प्रोब की सहायता से ईसीजी सिग्नल प्राप्त किए जाते हैं। शरीर पर निर्धारित स्थानों पर लगाए जाने वाले सेंसर हृदय की विद्युत गतिविधियों से संबंधित संकेत रिकॉर्ड करते हैं। इसके बाद रिकॉर्ड किए गए डेटा को मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से देखा जा सकता है। एप में कई महीनों तक का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सुविधा भी दी गई है, जिससे पुरानी और नई रिपोर्ट की तुलना करने में मदद मिल सकती है। मयंक भार्गव ने अपने साथी केतन का यह नवाचार आईओटी, एआई और डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी के समन्वय का उदाहरण है। इस प्रकार की तकनीक भविष्य में घर पर स्वास्थ्य निगरानी, पुराने रिकॉर्ड के प्रबंधन और जरूरत पडऩे पर समय रहते चिकित्सकीय सहायता लेने में उपयोगी साबित हो सकती है।

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