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𝙎𝙝𝙞𝙫𝙥𝙪𝙧𝙞 𝙆𝙝𝙖𝙗𝙖𝙧

Monday, March 25, 2019

गुना-शिवपुरी सीट से सिंधिया के मुकाबले में वीरेन्द्र रघुवंशी से नहीं बेहतर कोई उम्मीदवार

घर में सीखे अनुभव को चुनावी समर में प्रत्याशी बन भुनाने का कर सकते हैं  प्रयास
शिवपुरी- भारतीय जनता पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव में शिवपुरी-गुना से कोई बेहतर दावेदार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा लेकिन यदि घर में ही तलाशा जाए तो संभव है हालातों के मद्देनजर पार्टी के नियम निर्देशों को भी संशोधित कर वर्तमान विधायक कोलारस वीरेन्द्र रघुवंशी को चुनावी समर में उतारा जा सकता है। 
यह वही वीरेन्द्र रघुवंशी है जिन्होंने वर्ष 2007 के उप चुनाव में मप्र की तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री सहित उनके पूरे मंत्री मण्डल के शिवपुरी में डेरा डालने के बाद भी पराजित कर सिंधिया के सम्मान को ऊंचाईयों पर पहुंचाया था इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगामी वर्ष 2013 के चुनावों में भी  वीरेन्द्र रघुवंशी को विश्वास था कि वह उप चुनाव की भांति आम विधानसभा चुनाव में भी शिवपुरी विधानसभा से जनता के विश्वास पर खरा उतरेंगें और इसके लिए उन्होंने अपने छ: माह के कार्यकाल में ही जनता को वह सब करके दिखा दिया था जिससे वह विधायक बनने के रूप में नजर आ रहे थे लेकिन 2013 के आम चुनाव में वीरेन्द्र के सामने भाजपा ने महल से ही दोवदारी कराते हुए यशोधरा राजे सिंधिया को उम्मीदवार बनाया और तब महल में एक-दूसरे के प्रति विरोध ना करते हुए कहीं ना कहीं षडयंत्र के तहत वीरेन्द्र रघुवंशी को पराजित कर महल की साख यशोधरा को विजयी बनाकर बचाया गया जबकि वीरेन्द्र रघुवंशी को इस चुनाव ने हाशिए पर डाल दिया। तभी उन्होंने निर्णय कर लिया कि वह अब अपने मान-सम्मान के लिए कांग्रेस पार्टी को ही छोड़ देंगें और कांग्रेस छोड़कर उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में आने के बाद भी वीरेन्द्र रघुवंशी के सम्मान में पार्टी ने कोई कोर कसर नहीं रखी और उन्हें प्रदेश कार्य समिति सदस्य तो बनाया गया साथ ही वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अशोकनगर और चंदेरी का विधानसभा प्रभारी भी बनाया गया। इससे यह आभास हो गया था कि वीरेन्द्र रघुवंशी अपनी जन्म स्थली कोलारस को छोड़कर उससे सटी अन्य दूसरी विधानसभा में जा सकते है लेकिन श्री रघुवंशी ने पहली प्राथमिकता अपनी जन्मस्थली कोलारस विधानसभा को दी और पार्टी ने वीरेन्द्र रघुवंशी पर विश्वास जताते हुए उन्हें वर्ष 2018 के विधानसभा में प्रत्याशी के रूप में उतारा और चूंॅकि यहां पूर्व से ही उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे महेन्द्र सिंह यादव ने भाजपा के देवेन्द्र जैन को हराकर कोलारस विधायक बने थे तो वहीं इस सीट पर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की साख भी लगी हुई थी जिस पर महेन्द्र सिंह यादव उप चुनाव के बाद जीतकर पुन: विधानसभा चुनाव 2018 लड़ रहे थे यहां उन्हें वीरेन्द्र रघुवंशी के मुकाबले पराजित होकर मुंह की खानी पड़ी और वीरेन्द्र रघुवंशी ने विजयश्री हासिल कर सांसद सिंधिया के सम्मान को करारी ठेस पहुंचाई। जिसकी टीस आज भी सांसद सिंधिया के मन में है और वह आए दिन गाहे-बगाहे अपने संसदीय क्षेत्र के दौरो में जब भी कोलारस आते है तो वह इस टीस को बार-बार दोहराना नहीं भुलते। यही कारण है कि घर में सीखे चुनावी बारीकियों को अब वीरेन्द्र रघुवंशी लोकसभा चुनाव में भुना सकते है। यह संसदीय क्षेत्र वह है जहां भाजपा के लिए हरेक लोकसभा चुनाव में अन्य प्रत्याशी तलाशी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन यदि सांसद सिंधिया के साथ वर्षों रहकर सीखी चुनावी अनुभव को वीरेन्द्र रघुवंशी ने करीब से जाना है और अब यदि सांसद सिंधिया के ही खिलाफ वीरेन्द्र रघुवंशी को लोकसभा चुनाव लड़ाया जाए तब संभव है कि कहीं ना कहीं वीरेन्द्र रघुवंशी अब तक के लोकसभा चुनाव में रहे भाजपा प्रत्याशी  से कहीं बेहतर परिणाम देकर आश्चर्यजनक इतिहास भी रच सकते है। 
लोकसभा में सिंधिया की हार के लिए एक विधायक करना होगा कुर्बान!
देखा जाए तो गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट भाजपा के लिए हमेशा से ही पराजय का विषय रही है जिसमें स्व.देशराज सिंह यादव, डॉ.नरोत्तम मिश्रा, जयभान सिंह पवैया जैसे बड़े चेहरे भी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ नहीं टिक सके। लेकिन आज वर्तमान हालातों को देखा तो जनता में आक्रोश है कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के प्रति भी वह नाराज है और क्षेत्रीय मतदाताओं के बीच यदि किसी चेहरे की बात करें तो भले ही वीरेन्द्र रघुवंशी विधायक है लेकिन यदि सांसद सिंधिया के खिलाफ वह चुनाव लड़कर मोदी लहर में विजयी पताका फहरा गए तो भाजपा की यह कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी बल्कि लोकसभा चुनाव में परिणाम पक्ष में आए तो फिर से भाजपा अपना विधायक तो बना ही लेगी लेकिन साथ ही कांग्रेस के गढ़ में कद्दावर नेता सिंधिया को पराजित किया तो भाजपा की साख, आन-बान और शान कहीं अधिक बढ़ जाएगी। 

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