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𝙎𝙝𝙞𝙫𝙥𝙪𝙧𝙞 𝙆𝙝𝙖𝙗𝙖𝙧

Saturday, July 13, 2019

पांच वर्षों से बिछड़े भाई को भाई से मिलाया अपना घर आश्रम ने

शिवपुरी- अपने से बिछड़े हुए और बेसुध प्रभुजियों की सेवा में कार्यरत अपना घर आश्रम संस्था द्वारा दो प्रभुजियों को उनके घर विदा किया गया। यह मार्मिक दृश्य जब प्रभुजियों को लेने आए उनके परिजनों के समक्ष उनकी दास्तां को बयां किया तो परिजन अपने आंसुओं को रोक ना सके और इस दुव्र्यवस्था के बाद स्वस्थ होकर जब एक भाई ने अपने बिछड़े हुए भाई को देखा तो वह रूंधे हुए गले से लग गया और भगवान राम-भरत मिलाप का चरित्र अपना
घर आश्रम शिवपुरी में देखने को मिला। अपना घर आश्रम के गोविन्द बंसल द्वारा बताया गया कि गुड्डू प्रभुजी को लेने उनके परिजन बड़े भाई शिवपुरी आए और भाई मोईन अहमद सिद्दीकी प्रभुजी गुड्डू को वाराणसी अपने साथ ले गए। प्रभुजी गुड्ू जिनका नाम मो.अनीस अहमद उम्र लगभग 40 वर्ष को दिनांक 19 जनवरी 2019 को कोलारस में रोड़ पर विक्षप्ति अवस्था में घूमे हुए कमलेश गुप्ता ने देखा तो उससे बात करना चाहा लेकिन प्रभुजी ने कोई जबाब नहीं दिया और बाद में कमलेश गुप्ता ने अपना घर आश्रम को सूचित किया। जहां प्रवेशित क्रं.111 पर आश्रम में प्रभुजी गुड्डू की सेवा की गई। लगभग 4 माह बाद मानसिक रूप से कुछ स्वस्थ होने पर उन्होंने अपना पता बताया ग्राम रामनगर, कटेसर कलां, वाराणसी उ.प्र., जहां वाराणसी आश्रम को सूचित कर उनके घर के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तथा वाराणसी पुलिस थाने से संपर्क कर उनसे सहयोग की अपेक्षा की। तब उनके परिवार से संपर्क हो सका। जहां प्रभुजी गुड्डू के पिता की स्वर्गवास हो चुका है और मॉं अपने छोटे बेटे के खाने के गम में गमगीन है एवं वर्तमान में प्रभुजी की मॉं कोमा (बेहोशी हालत)में है। प्रभु जी के भाई मोईन अहमद सिद्दीकी ने बताया कि पिछले 5 वर्षों से अनीस घर से चला गया था बीच में घर आ गया, फिर चला गया किन्तु अब 1 वर्ष से वह वापस घर नहीं पहुंचा। वहीं प्रभुजी गुड्डू के स्वस्थ होने पर जब परिजन शिवपुरी आए तो भाई मोइन अहमद सिद्दीकी गुड्डू प्रभुजी को देखकर खुशी से प्रफुल्लित हुए और वह अपने आंसूओं को रोक ना सके और रूदन करते हुए अपने भाई के गले लग गए। बाद में विधि-विधान से प्रभुजी गुड्डू को विदाई दी गई। इस अवसर पर आश्रम समिति के सचिव शीतल जैन, संयोजक गौरव जैन, वित्त सचिव गोविन्द बंसल, कार्यकारिणी सदस्य कमलेश गुप्ता आदि ने प्रभुजी को तिलक लगाकर खुशी-खुशी अपने घर के लिए विदा किया। 

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