भाई की कलाई पर बंधने वाली रखी को लेकर बाल संरक्षण अधिकारी ने दिया जनमानस को संदेशशिवपुरी- रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी के कच्चे धागे को बांधकर अपनी सुरक्षा की प्रतिबद्धता का पक्का वचन लेती है। रक्षाबंधन कर्तव्यों की याद दिलाने वाला त्यौहार है। यह बहन बेटियों की हिफाजत का प्रण लेने का दिन है। रक्षाबंधन भाई बहन के पारस्परिक प्रेम, स्नेह एवं विश्वास का त्यौहार है। यह पर्व कर्तव्य, आत्मीयता, त्याग, सामाजिक एकता व सद्भाव की भावना का प्रतीक है। प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह बहनों की रक्षा के बचन बंधन में अपने मन.वाणी एवं कर्म तीनों को बांधे जब तक तीनों में एकरूपता नही होगी त्यौहार का कोई मतलब नही। उक्त संंदेश दिया महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बाल संरक्षण अधिकारी राघवेन्द्र शर्मा ने जिन्होंने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जनमानस को राखी के त्यौहार को लेकर भाई की कलाई पर बंधने वाली राखी का महत्व बताया।
श्री शर्मा ने बताया कि त्यौहार हमें प्रत्येक बहन बेटी की हिफाजत करने को प्रतिबद्ध करता है। हमारी संस्कृति हमें श् जननी सम जानें पर नारी श् पथ पर चलने का संदेश देती है। संसार में भाई बहन का रिस्ता पवित्रएत्याग एवं समर्पण का रिस्ता होता है। हर बहन मुशीबत में अपने भाई से मदद की आशा रखती है। यही कारण होता है कि वह अपने विस्वास की मजबूती को कायम रखने के लिए रक्षाबंधन के दिन भाई से अपनी रक्षण. संरक्षण की प्रतिबद्धता का प्रण लेने को प्रेरित करती है।
श्री शर्मा ने कहा कि मेरी बहन-तेरी बहन नहीं, हर बेटी को मां, बहन और बेटी का स्वरूप मानकर उनकी हिफाजत करने का संकल्प हमें लेना होगा। जब तक हम अपनी सोच को नहीं बदलेंगे। मेरी-तेरी के माया जाल से बाहर नहीं निकलेंगे, तब तक बेटियों के साथ होतीं बलात्कार और छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग सकता। रिश्तों और त्योहारों की मर्यादाओं को बनाए रखने के लिए हमें बेटियों को बहन की प्रतिमूर्ति मानकर उन्हें खुला. आजाद माहौल दिलाना होगा। बहनों की सुरक्षा के लिए हमें तत्परतापूर्वक काम करना होगा तभी हमारे त्योहार को मनाने के उद्देश्य पूर्ण होंगे।
राखी पर सजा बाजार लेकिन त्रासदी से फीका रहा व्यापार
एक ओर जहां आज रक्षाबंधन का त्यौहार मनाए जाने को लेकर राखी का बाजार सजा है तो वहीं दूसरी ओर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी और प्राकृतिक आपदा के रूप में आई बाढ़ के कारण इस बार व्यापार काफी फीका रहा। यही हालात रहे कि बाजार में राखी खरीदारों की भीड़ तो उमड़ी लेकिन अधिकांश दुकानदारों को निराशा का ही सामना करना पड़ा बाबजूद इसके ग्रामीण अंचल और स्थानीय शहरवासियों ने भी बाजार से अपनी पसंदीदा राखी का चयन कर खरीदारी दी। हालांकि बाजार में कई तरह की आकर्षक राखियां भी देखने को मिली लेकिन उस पर भी महंगाई की मार थी।
राखी पर सजा बाजार लेकिन त्रासदी से फीका रहा व्यापार
एक ओर जहां आज रक्षाबंधन का त्यौहार मनाए जाने को लेकर राखी का बाजार सजा है तो वहीं दूसरी ओर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी और प्राकृतिक आपदा के रूप में आई बाढ़ के कारण इस बार व्यापार काफी फीका रहा। यही हालात रहे कि बाजार में राखी खरीदारों की भीड़ तो उमड़ी लेकिन अधिकांश दुकानदारों को निराशा का ही सामना करना पड़ा बाबजूद इसके ग्रामीण अंचल और स्थानीय शहरवासियों ने भी बाजार से अपनी पसंदीदा राखी का चयन कर खरीदारी दी। हालांकि बाजार में कई तरह की आकर्षक राखियां भी देखने को मिली लेकिन उस पर भी महंगाई की मार थी।
शहर में कई मिष्ठान विक्रेताओं ने अपनी दुकानें ही नहीं सजाई क्योंकि इस बार राखी का त्यौहार लोगों के लिए काफी परेशानी वाला साबित हुआ। बाजार में कुछेक दुकानदारों ने ही अपनी मिठाई की दुकानों को सजाया। बता दें कि इस बार कोरोना का प्रभाव काफी अधिक रहा और कई लोग असमय काल के गाल में समा गए, अभी लोग इस दु:ख से उभर भी नहीं पाए थे कि अगस्त माह की शुरूआत में ही तेज बारिश ने प्राकृतिक कहर ढाया और कई घरों और दुकानदारों को लाखों- करोड़ों का नुकसान कर आर्थिक बोझ डाल दिया। ऐसे में राखी के त्यौहार पर सजा बाजार भी फीका ही नजर आया।
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