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Friday, April 22, 2022

सहारा कपनी उपभोक्ता जमा धनराशि पर अदा करे 7 प्रतिशत का ब्याज


जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने दिया निर्णय

शिवपुरी- जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग शिवपुरी म.प्र. के द्वारा सहारा कंपनी में निवेशक को जमा धनराशि के साथ 7 प्रतिशत की दर से ब्याज जमा करने का आदेश पारित किया गया है। इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के अध्यक्ष श्री गौरीशंकर दुबे एवं सदस्य श्रीतानाजी राव द्वारा अपने आदेश दिनांक 14/03/22 के पारितत निर्णय में प्रकरण क्रं.316/20 शंभू लखेरा एवं 317/20 आकाश भसीन बनाम सहारा प्रबंधक, सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स लिमिटेड आदि में महत्वपूर्ण निर्णय पारित कर अनावेदकगणों के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की गई है।

यहां आवेदन शंभू लखेरा व आकाश भसीन की ओर अधिवक्ता जितेन्द्र समाधिया के द्वारा पैरवी की गई जिसमें आवेदक शुभम लखेरा के द्वारा सहारा क्यू शॉप युनिक प्रोडक्ट्स कंपनी लिमि. में 7500 रूपये की राशि 24/04/2018 को जमा की थी जिसकी परिपक्वता राशि 15100 रूपये प्राप्त की थी किन्तु परिपक्वता पूर्ण होने पर आवेदन शंभू लखेरा के द्वारा कई बार सहारा प्रबंधक कार्यालय पर उक्त राशि प्राप्त करने हेतु संपर्क किया परन्तु अनावेदक को निवेश की गई राशि परिपक्वता पूर्ण होने के बाद भी आवेदक को निवेश की गई राशि परिपक्वता राशि वापिस नहीं की गई। 

जिस पर अपने अधिवक्ता जितेन्द्र समाधिया के द्वारा धारा 35 उपभोक्ता संरक्षण अधि. के तहत माननीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के समक्ष अलग-अलग दो प्रकरण में परिवाद प्रस्तुत किया गया। जिसमें माननीय न्यायालय ने अपने पारित निर्णय में स्पष्ट किया कि निर्णय दिनांक से 01 माह के भीतर आवेदक को उसके द्वारा सहारा कंपनी में जमा की गई राशि 7500 रूपए एवं परिपक्वता राशि एवं संपूर्ण परिपक्वता राशि पर परिपक्वता दिनांक से अदायगी दिनांक तक 7 प्रतिशत ब्याज भी अलग से जमा करना होगा।

यही प्रकरण आवेदक आकाश भसीन के प्रकरण क्रं.317/20 पर भी पारित हुआ जिसमें न्यायालय द्वारा निर्णय दिनांक से 1 माह के भीतर आवेदक आकाश भसीन को सहारा कंपनी प्लांट में जमा की गई राशि 13100 रूपये संपूर्ण परिपक्वता राशि पर परिपक्वता दिनांक से 7 प्रतिशत वार्षिक दर से अतिरिक्त ब्याज भी अदा करने के आदेश दिए है। इन दोनों ही मामलों में आवेदकगणों की ओर से पैरवी अधिवक्ता जितेन्द्र समाधिया के द्वारा की गई जिस पर अधिवक्ता के तर्कों व साक्ष्यों के आधार पर माननीय न्यायालय ने उपभोक्ता सेवा में कमी कर उक्त आदेश पारित किया है।

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